NEET प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सभी FIR रद, CJP ने वापस लिया मार्च

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने नीट (NEET) प्रदर्शन मामले में छात्रों और आंदोलनकारियों को बड़ी राहत देते हुए उन पर दर्ज सभी एफआईआर (FIR) रद्द करने का ऐतिहासिक निर्देश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों

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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने नीट (NEET) प्रदर्शन मामले में छात्रों और आंदोलनकारियों को बड़ी राहत देते हुए उन पर दर्ज सभी एफआईआर (FIR) रद्द करने का ऐतिहासिक निर्देश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को रद्द माना जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि जिन आरोपियों का गंभीर आपराधिक इतिहास (Criminal Record) रहा है, उन्हें इस छूट का लाभ नहीं मिलेगा।

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केंद्र सरकार और राज्यों के रुख की कोर्ट ने की सराहना

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जानकारी दी कि दिल्ली पुलिस के साथ-साथ बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सरकारों ने छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने की याचिकाएं दायर की हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के बीच बने सहमति के माहौल की सराहना की। केंद्र सरकार ने कोर्ट को आश्वस्त किया था कि 20 जुलाई के प्रदर्शन को लेकर किसी भी निर्दोष छात्र पर नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। हालांकि, जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल 2,873 लोगों में से केवल गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले चुनिंदा लोगों के खिलाफ जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है।

CJP ने 5 सितंबर का दिल्ली मार्च लिया वापस

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले और केंद्र सरकार के सकारात्मक आश्वासन के बाद सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) ने 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में प्रस्तावित अपना बड़ा विरोध मार्च वापस ले लिया है। CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने अदालत और दोनों पक्षों के वकीलों का आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि शीर्ष अदालत के आदेश का समयबद्ध तरीके से पालन किया जाएगा।

पीड़ित परिवारों के मुआवजे के लिए 3 महीने की समयसीमा

NEET-UG 2026 परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले पीड़ित छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के संवेदनशील मुद्दे पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सख्त दिशा-निर्देश दिए। सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार पीड़ित परिवारों को वित्तीय सहायता देने के अपने वादे पर कायम है और इसके प्रारूप को अंतिम रूप देने के लिए समय चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 3 महीने के भीतर मुआवजे की पूरी प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया।

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