रांची। राज्य सरकार ने झारखंड प्रशासनिक सेवा के तीन अलग-अलग अधिकारियों पर चले विभागीय कार्यवाही को समाप्त करते हुए आरोपमुक्त कर दिया है। कार्मिक ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। जारी आदेश के अनुसार दो अधिकारियों को उनके ऊपर लगे आरोपों से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। जबकि एक महिला अधिकारी के खिलाफ पूर्व में लगाए गए दंड को उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में विलोपित (रद्द) कर दिया गया है।
अनिल कुमार यादव (तत्कालीन उप नगर आयुक्त, धनबाद)
-मामला : वर्ष 2016-17 के दौरान धनबाद नगर निगम में मेसर्स व्योम टेक्नोलॉजी लिमिटेड द्वारा आपूर्ति की गई सामग्रियों की गुणवत्ता एवं मात्रा का सत्यापन किए बिना भुगतान करने और लगभग 2.65 करोड़ रुपये के कथित दुरुपयोग का आरोप था। इस पर आरोप प्रमाणित नहीं हो पाया।
जीतेंद्र कुमार देव (तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, पाकुड़)
– मामला : पाकुड़ पदस्थापन के दौरान सैरातों की बंदोबस्ती, बिना निविदा कार्य आवंटन, वरीय अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना और शहरी जलापूर्ति योजना में शिथिलता से जुड़े कुल 19 आरोप पत्रित किए गए थे. विभागीय जांच में अधिकांश आरोप प्रमाणित नहीं हुए और अन्य बिंदुओं पर आरोपी पदाधिकारी का बचाव पक्ष स्वीकार्य पाया गया. इसके पश्चात, सरकार ने जांच रिपोर्ट से सहमत होते हुए जीतेंद्र कुमार देव को सभी आरोपों से आरोप मुक्त कर दिया है.
अंजना दास (तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी, गढ़वा नगर परिषद)
– मामला : गढ़वा में एलइडी LED लाइट अधिष्ठापन, डस्टबिन आपूर्ति और सोनपुरवा बस स्टैंड जीर्णोद्धार में अनियमितता के आरोप में वर्ष 2024 में दो वेतन वृद्धि रोकने का दंड दिया गया था. इसके बाद झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा 20 अप्रैल 2026 को पारित न्यायादेश के पालन में, सरकार ने पूर्व में अधिरोपित दंड को विलोपित (रद्द) करने का आदेश जारी कर दिया है.



