रांची : राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में सजा जेसोवा दिवाली मेला इस बार खरीदारी और मनोरंजन के साथ सामाजिक सरोकारों को लेकर भी चर्चा में है। झारखंड IAS ऑफिसर्स वाइव्स एसोसिएशन (JIASOWA) के दिवाली मेला 2026 का उद्घाटन गुरुवार को झारखंड के मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने किया। इस दौरान चाईबासा, देवघर और दुमका के पुस्तकालयों के विकास के लिए कुल 45 लाख रुपये की सहायता दी गई।
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मुख्य सचिव ने संस्था के सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि मेले का उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ कमाना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की मदद करना और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी है। बारिश के बावजूद मोरहाबादी मैदान में मेले की रौनक बनी हुई है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सितार और सरोद की जुगलबंदी ने संगीत प्रेमियों का ध्यान खींचा। सुगम संगीत, नृत्य प्रस्तुतियों और कठपुतली शो का भी लोगों ने आनंद लिया।
तीन जिलों के पुस्तकालयों को मिले ₹45 लाख
जेसोवा ने झारखंड के तीन जिलों में पुस्तकालयों के विकास के लिए आर्थिक सहयोग दिया है। चाईबासा, देवघर और दुमका के पुस्तकालयों को 15-15 लाख रुपये प्रदान किए गए हैं। इस तरह तीनों पुस्तकालयों को कुल 45 लाख रुपये की सहायता मिली है। इस राशि से पुस्तकालयों में विद्यार्थियों के लिए अध्ययन की बेहतर सुविधाएं विकसित करने में मदद मिलेगी। खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को इसका लाभ मिल सकता है। इससे उन विद्यार्थियों को भी बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, जिनके पास घर पर पढ़ाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं।
विशेष बच्चों की प्रतिभा निखारने के लिए भी मदद
जेसोवा ने मूक-बधिर और दृष्टिबाधित बच्चों को संगीत की शिक्षा देने के लिए भी आर्थिक सहायता प्रदान की है। इसके तहत श्रेयशी बनर्जी को 96 हजार रुपये की सहयोग राशि दी गई। वहीं, बच्चों में कला और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्वास्तिका बनर्जी को भी 96 हजार रुपये दिए गए। संस्था का उद्देश्य बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना और उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर देना है।
मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने क्या कहा?
उद्घाटन समारोह में मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने कहा कि जेसोवा दिवाली मेला केवल व्यापार और मुनाफे तक सीमित नहीं है। यह समाज के वंचित वर्गों के कल्याण, कला-संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक दायित्वों को निभाने का भी माध्यम है। उन्होंने कहा कि JIASOWA विशेष बच्चों सहित अन्य बच्चों की प्रतिभा निखारने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। संस्था के काम शिक्षा के प्रसार, रचनात्मकता को प्रोत्साहन और समाज के समग्र विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से शिल्पकार, कारीगर और कलाकार अपनी प्रतिभा दिखाने पहुंचते हैं। इससे लोगों को विभिन्न क्षेत्रों की कला, संस्कृति और परंपराओं को जानने का अवसर मिलता है। साथ ही सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलता है।
अब 3 नवंबर तक चलेगा जेसोवा दिवाली मेला
बारिश और मौसम की संभावनाओं को देखते हुए जेसोवा दिवाली मेला 2026 के समापन की तारीख में बदलाव किया गया है। JIASOWA की अध्यक्ष प्रीति कुमार ने बताया कि पहले मेले का समापन 2 नवंबर को होना था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 3 नवंबर 2026 कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि मेले की अवधि बढ़ाने का एक उद्देश्य यहां भाग लेने वाले वेंडर्स को संभावित आर्थिक नुकसान से बचाना भी है। अतिरिक्त समय मिलने से उन्हें अपना सामान बेचने और कारोबार करने का अधिक अवसर मिलेगा।
मेले में मुफ्त मिल रहीं सरकारी योजनाओं की पत्र-पत्रिकाएं
मेले में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने भी अपना स्टॉल लगाया है। यहां लोगों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही सरकारी योजनाओं से जुड़ी पत्र-पत्रिकाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्टॉल पर LED टीवी के माध्यम से सरकारी योजनाओं पर आधारित शॉर्ट फिल्में और डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई जा रही हैं। इससे मेले में आने वाले लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और उनके लाभों के बारे में जानकारी मिल रही है। खरीदारी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच जेसोवा दिवाली मेले में शिक्षा, बच्चों की प्रतिभा और जरूरतमंदों की मदद से जुड़े प्रयास भी देखने को मिल रहे हैं। पुस्तकालयों को आर्थिक सहायता और विशेष बच्चों के लिए किए गए प्रयास मेले के सामाजिक उद्देश्य को सामने रखते हैं।



