रांची: झारखंड के प्रसिद्ध रजरप्पा मंदिर के पुनरुद्धार से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मंदिर के पुनरुद्धार को लेकर दायर अवमानना याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट के निर्देश के बावजूद पर्यटन विभाग के सचिव उपस्थित नहीं हो सके। सरकार की ओर से उनके लिए समय मांगा गया। इस पर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 5 अक्टूबर तय करते हुए पर्यटन सचिव और रामगढ़ के उपायुक्त (DC) को सशरीर अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया।
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सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि रजरप्पा मंदिर के पुनरुद्धार के लिए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड से राशि उपलब्ध कराने पर विचार किया जा रहा है। इस पर अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को अगली सुनवाई में DMFT फंड से संबंधित योजना प्रस्तुत करने को कहा है। याचिकाकर्ता संजीव कुमार सिंह की ओर से अधिवक्ता भरत कुमार ने पक्ष रखा।
पर्यटन सचिव को कोलकाता में कार्यक्रम का हवाला देकर मांगी गई मोहलत
मंगलवार को सुनवाई के दौरान पर्यटन विभाग के सचिव अदालत में उपस्थित नहीं हो सके। सरकार के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि सचिव नीति आयोग के एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोलकाता जाएंगे। इस कारण उनकी उपस्थिति के लिए अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया गया।
अदालत ने इस आग्रह के बाद सुनवाई 5 अक्टूबर तक स्थगित कर दी। साथ ही अगली तारीख पर पर्यटन सचिव के अलावा रामगढ़ DC को भी सशरीर उपस्थित रहने का निर्देश दिया।
मंदिर के पुनरुद्धार के लिए DMFT फंड से राशि लेने की बात
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने रजरप्पा मंदिर के पुनरुद्धार के लिए DMFT फंड से राशि उपलब्ध कराने की बात कही। इस पर हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को 5 अक्टूबर को DMFT फंड से संबंधित योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
अदालत इस मामले में मंदिर के पुनरुद्धार के लिए अब तक उठाए गए कदमों और वित्तीय व्यवस्था को लेकर सरकार से जवाब चाहती है।
पिछली सुनवाई में सरकार से पूछा था सवाल
गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से मंदिर के पुनरुद्धार को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश या ठोस जानकारी नहीं दी गई थी। इस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया था कि पहले सरकार ने अपने संसाधनों से पुनरुद्धार के लिए राशि की व्यवस्था करने की बात कही थी और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कराने के लिए कंसल्टेंट भी नियुक्त किया था।
इसके बाद सरकार की ओर से केंद्र की PRASAD (Pilgrimage Rejuvenation and Spiritual Heritage Augmentation Drive) योजना के तहत वित्तीय सहायता लेने पर विचार करने की बात सामने आई थी। अदालत ने इस पर सवाल किया था कि यदि शुरुआत से ही केंद्र की योजना से राशि लेने का विचार था, तो इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई।
5 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
रजरप्पा मंदिर के पुनरुद्धार से जुड़े इस मामले में अब 5 अक्टूबर को अगली सुनवाई होगी। इस दौरान पर्यटन सचिव और रामगढ़ DC को अदालत में उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार को DMFT फंड से संबंधित योजना भी प्रस्तुत करनी है।




