रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी द्वारा सीआईडी जांच और एडीजी मनोज कौशिक की भूमिका पर उठाए गए सवालों पर पलटवार करते हुए कहा कि जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करना और सरकार की हर जांच पर संदेह पैदा करना भाजपा की पुरानी आदत रही है।
उन्होंने कहा कि मनोज कौशिक एक संवेदनशील, गंभीर और जिम्मेदार अधिकारी हैं। भाजपा यदि उनके कामकाज पर सवाल उठा रही है तो उसे पहले यह बताना चाहिए कि भाजपा के पास ऐसे कितने अधिकारी हैं, जिनकी कार्यशैली और प्रशासनिक क्षमता का वह उदाहरण दे सकती है।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि भाजपा को आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति करने से पहले अपने अतीत को याद करना चाहिए। भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण को कैमरे के सामने कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए पूरे देश ने देखा था। इसलिए भाजपा नेताओं को नैतिकता का प्रमाणपत्र बांटने से पहले अपने राजनीतिक इतिहास में झांकना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज आरोप-प्रत्यारोप में उलझने का समय नहीं है। यह समय झारखंड के लाखों छात्रों और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने का है। जेपीएससी, जेएसएससी और सीजीएल जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा को वापस स्थापित करना सरकार की प्राथमिकता है। जिन संस्थाओं को भाजपा के शासनकाल में अव्यवस्था और विवादों ने कमजोर किया, उन्हें फिर से मजबूत बनाने की दिशा में सरकार काम कर रही है।
प्रदेश कांग्रेस महासचिव ने कहा कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुना जा रहा है और सरकार संवाद के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है। छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों को राजनीतिक अखाड़ा बनाने के बजाय सभी राजनीतिक दलों को समाधान का हिस्सा बनना चाहिए।
सीबीआई जांच की मांग पर पलटवार करते हुए आलोक कुमार दूबे ने कहा कि सीबीआई को हर मामले में रामबाण इलाज बताने वालों को पहले यह बताना चाहिए कि देश ने सीबीआई की कार्यप्रणाली और उसके राजनीतिक इस्तेमाल के आरोपों को लेकर कितने सवाल नहीं सुने हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं और सरकारों के खिलाफ सीबीआई के इस्तेमाल का इतिहास किसी से छिपा नहीं है।
उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने राजनीतिक सफर और भाजपा के शासनकाल का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए। आज झारखंड में सरकार छात्रों की समस्याओं को सुन रही है, संवाद कर रही है और संस्थागत सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि “भाजपा को समझना होगा कि झारखंड का युवा अब सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं चाहता। वह पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था, समय पर नियुक्ति और अपने भविष्य की सुरक्षा चाहता है। कांग्रेस पार्टी छात्रों के साथ खड़ी है और जेपीएससी-जेएसएससी जैसी संस्थाओं की खोई हुई विश्वसनीयता वापस दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास का समर्थन करेगी।”
उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी को अनावश्यक विवाद खड़ा करने के बजाय अपने गिरेबान में झांकना चाहिए और यह बताना चाहिए कि भाजपा के लंबे शासनकाल में झारखंड की नियुक्ति व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली किस हालत में पहुंची। आज की जरूरत आरोपों की राजनीति नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य को बचाने की राजनीति है।



