रिम्स में फेस बेस्ड अटेंडेंस का विरोध, JDA ने डीन को लिखा पत्र

रांची : रिम्स में जूनियर रेजिडेंट (JR), सीनियर रेजिडेंट (SR) और असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिए प्रस्तावित फेस बेस्ड अटेंडेंस सिस्टम को लेकर जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने कड़ा विरोध जताया है। JDA ने रिम्स के डीन को पत्र भेजकर फेस बेस्ड अटेंडेंस को वेतन और

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रांची : रिम्स में जूनियर रेजिडेंट (JR), सीनियर रेजिडेंट (SR) और असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिए प्रस्तावित फेस बेस्ड अटेंडेंस सिस्टम को लेकर जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने कड़ा विरोध जताया है। JDA ने रिम्स के डीन को पत्र भेजकर फेस बेस्ड अटेंडेंस को वेतन और स्टाइपेंड से जोड़ने के प्रस्ताव को स्थगित करने की मांग की है। JDA ने कहा कि वह जवाबदेही, समयबद्धता और पारदर्शी उपस्थिति व्यवस्था के खिलाफ नहीं है। हालांकि, डॉक्टरों की कमी, बढ़ते कार्यभार और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति में सुधार किए बिना नई व्यवस्था लागू करना उचित नहीं होगा।

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सिर्फ कुछ डॉक्टरों पर व्यवस्था लागू करने पर सवाल

JDA ने यह भी सवाल उठाया कि फेस बेस्ड अटेंडेंस सिस्टम को सिर्फ जूनियर रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट और असिस्टेंट प्रोफेसरों तक ही क्यों सीमित किया जा रहा है। एसोसिएशन ने इसे भी आपत्तिजनक बताया है। JDA का कहना है कि किसी भी अटेंडेंस व्यवस्था को लागू करने से पहले रिम्स में काम करने वाले डॉक्टरों की वास्तविक परिस्थितियों और उनकी जिम्मेदारियों को ध्यान में रखना जरूरी है।

काम के घंटे को लेकर JDA ने उठाए सवाल

जेडीए ने रेजिडेंट डॉक्टरों के निर्धारित कार्य घंटों के पालन पर भी सवाल उठाया है। एसोसिएशन के मुताबिक लागू एनएमसी मानकों में रेजिडेंट डॉक्टरों के काम के घंटे सामान्यतः सप्ताह में 48 घंटे से अधिक नहीं होने चाहिए, जबकि विशेष परिस्थितियों में यह 60 घंटे तक हो सकते हैं। JDA ने कहा कि पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि रिम्स में इन मानकों का वास्तविक रूप से पालन हो रहा है या नहीं। इसके साथ ही पर्याप्त स्टाफ और फैकल्टी, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, उचित ड्यूटी रोस्टर, आराम की व्यवस्था और वेतन-स्टाइपेंड का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

बायोमेट्रिक एंट्री-एग्जिट से पूरी ड्यूटी आंकने पर आपत्ति

JDA का तर्क है कि रातभर इमरजेंसी ड्यूटी करने और अगले दिन राउंड व प्रक्रियाओं में शामिल होने वाले डॉक्टरों की पूरी कार्यप्रणाली को केवल बायोमेट्रिक एंट्री और एग्जिट के आधार पर नहीं आंका जा सकता। एसोसिएशन ने कहा कि डॉक्टरों की वास्तविक ड्यूटी और जिम्मेदारियों को भी उपस्थिति व्यवस्था में ध्यान में रखा जाना चाहिए।

2024 के सरकारी पत्र का दिया हवाला

JDA ने अपने पत्र में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के 23 सितंबर 2024 के पत्र का हवाला दिया है। एसोसिएशन के अनुसार 2015 के संबंधित नियमों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस को वेतन भुगतान से जोड़ने का कोई प्रावधान नहीं है। JDA ने इसी आधार पर प्रस्तावित व्यवस्था की प्रशासनिक और नियामकीय स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

चर्चा के बाद नीति लागू करने की मांग

जेडीए ने प्रशासन से फेस बेस्ड अटेंडेंस नीति लागू करने से पहले संगठन के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करने की मांग की है। एसोसिएशन ने कहा कि डॉक्टरों की वास्तविक समस्याओं और काम की परिस्थितियों को समझने के बाद ही ऐसी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। JDA ने चेतावनी दी है कि मांगों पर विचार नहीं होने की स्थिति में वह लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से आगे की कार्रवाई पर विचार करने को मजबूर होगा।

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