रांची:  झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा राहुल गांधी पर लगाए गए आरोपों पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा नेताओं को राहुल गांधी पर आरोप लगाने और उन्हें आतंकवादी, राष्ट्रद्रोही अथवा विदेशी ताकतों का एजेंट बताने की राजनीति करने में बहुत देर हो गई है।
देश की जनता अब भाजपा की इस पुरानी और घिसी-पिटी राजनीति को अच्छी तरह पहचान चुकी है। जब भी सरकार से रोजगार, महंगाई, किसानों की बदहाली, छात्रों के भविष्य, युवाओं के अधिकार और लोकतंत्र से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं, तब जवाब देने के बजाय विपक्ष के नेताओं को बदनाम करने और उन पर देशविरोधी होने का ठप्पा लगाने की कोशिश शुरू हो जाती है।

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आलोक कुमार दुबे ने कहा कि किसानों का ऐतिहासिक आंदोलन हो, छात्रों और नौजवानों का आक्रोश हो, बेरोजगार युवाओं के सवाल हों या भाजपा सरकार के खिलाफ देशभर में उठती आवाजें—हर बार सरकार ने समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलनकारियों की नीयत पर सवाल उठाने का रास्ता चुना है। कभी आंदोलनकारियों को देशद्रोही बताया जाता है, कभी उन्हें विदेशी ताकतों से जोड़ दिया जाता है और कभी आतंकवाद का भय दिखाकर जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जाती है।
भाजपा को समझ लेना चाहिए कि देशभक्ति का प्रमाणपत्र बांटने का ठेका किसी एक राजनीतिक दल ने नहीं ले रखा है। लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं, बल्कि नागरिकों का अधिकार और सरकार की जवाबदेही तय करने का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने देश के सामने चुनावी प्रक्रिया, लोकतंत्र, बेरोजगारी, आर्थिक असमानता और आम नागरिकों से जुड़े जो सवाल उठाए हैं, उनका जवाब तथ्यों और तर्कों से दिया जाना चाहिए। लेकिन भाजपा के नेता सवालों का जवाब देने के बजाय आरोपों की बौछार कर रहे हैं। निशिकांत दुबे बताएं कि क्या देश के गृह मंत्री और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी केवल विपक्ष पर आरोप लगाना रह गई है? अगर विदेशी फंडिंग के जरिए देश को अस्थिर करने की साजिश हो रही है,
अगर सीमाओं के रास्ते आतंकवादी घुस रहे हैं, अगर देश में बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों की तस्करी हो रही है और अगर विदेशी नेटवर्क भारत के हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, तो इसकी जवाबदेही किसकी है? क्या देश की आंतरिक सुरक्षा, सीमाओं की निगरानी और विदेशी हस्तक्षेप रोकने की जिम्मेदारी राहुल गांधी की है या केंद्र की भाजपा सरकार और गृह मंत्रालय की?

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आलोक कुमार दुबे ने कहा कि यदि निशिकांत दुबे के पास विदेशी फंडिंग, आतंकवादी नेटवर्क, ड्रग्स तस्करी अथवा भारत को अस्थिर करने की कथित साजिश से जुड़े ठोस सबूत हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से तथ्यों के साथ सामने रखना चाहिए और संबंधित जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराना चाहिए। केवल राजनीतिक बयानबाजी और गंभीर आरोप लगाकर किसी की देशभक्ति पर सवाल खड़ा करना जिम्मेदार राजनीति नहीं है। आरोप लगाने वाले नेताओं को भी प्रमाण और जवाबदेही के उसी मानक पर खरा उतरना होगा, जिसकी अपेक्षा वे दूसरों से करते हैं।
उन्होंने भाजपा नेताओं से सवाल किया कि जब विदेशी ताकतों द्वारा भारत के हितों को नुकसान पहुंचाने की बात की जाती है, तो केंद्र सरकार की कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों पर चर्चा क्यों नहीं होती? अमेरिका के अधिकारियों और नेताओं के बयानों, भारत के प्रति उनके रुख तथा प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार से जुड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भाजपा नेता चुप्पी क्यों साध लेते हैं?
यदि किसी विदेशी नेता या अधिकारी द्वारा भारत अथवा उसके प्रधानमंत्री के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की जाती है, तो सरकार को तथ्यों के आधार पर देश के सम्मान और हितों की रक्षा करनी चाहिए। विपक्ष से सवाल और सत्ता से जवाबदेही—लोकतंत्र में यह दोहरा मापदंड नहीं चल सकता।
आलोक कुमार दुबे ने कहा कि राहुल गांधी को बदनाम करने से न बेरोजगार युवाओं को नौकरी मिलेगी, न किसानों की समस्याएं समाप्त होंगी, महंगाई कम होगी और न ही देश की सुरक्षा मजबूत होगी।
भाजपा को चाहिए कि वह राजनीतिक प्रतिशोध और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति छोड़कर जनता के वास्तविक सवालों का जवाब दे। देश की जनता जानना चाहती है कि सरकार ने रोजगार, शिक्षा, महंगाई, किसानों की आय और आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर क्या ठोस काम किया है।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि विपक्ष को बदनाम करके वे अनिश्चितकाल तक सत्ता में बने रहेंगे। राहुल गांधी लगातार जनता के मुद्दे उठा रहे हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार से जवाब मांग रहे हैं। भाजपा को इन सवालों का सामना करना होगा।

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