रांची: देशभर के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय न्यूनतम आपदा सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया ढांचा तैयार करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। रांची के सोशल एक्टिविस्ट ज्योति शर्मा ने इस विषय पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को एक पत्र भेजा था। इस पर संज्ञान लेते हुए एनडीएमए ने सुझावों की सराहना की है और इस मामले को आगे विचार-विमर्श तथा उचित कार्रवाई के लिए शिक्षा मंत्रालय को अग्रसारित कर दिया है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अवर सचिव एस. के. शर्मा द्वारा 25 सितंबर को जारी पत्र के अनुसार, स्कूलों में आपदा तैयारियों को मजबूत करने के लिए उठाए गए इन बिंदुओं को गंभीरता से दर्ज किया गया है।
सोशल एक्टिविस्ट द्वारा दिए गए प्रस्ताव में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक समान आपदा प्रबंधन ढांचा लागू करने पर बल दिया गया है। इसमें मुख्य रूप से स्कूली बच्चों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को सीपीआर, बेसिक लाइफ सपोर्ट, फर्स्ट-एड और एईडी के उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने का सुझाव शामिल है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि केवल किताबी ज्ञान के बजाय व्यावहारिक मॉक ड्रिल वर्ष में कम से कम दो बार आयोजित की जानी चाहिए ताकि आग, भूकंप या बाढ़ जैसी आपदाओं के समय त्वरित और सुरक्षित निकासी संभव हो सके। इसके अतिरिक्त, स्कूलों में सुरक्षित असेंबली पॉइंट, आपातकालीन निकास मार्गों का अंकन, छोटे बच्चों तथा दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था और जिला स्तर पर नियमित सुरक्षा ऑडिट कराने की सिफारिशें भी की गई हैं।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसी भी आपदा के शुरुआती कुछ महत्वपूर्ण मिनटों में सही कदम उठाकर बच्चों के जीवन की रक्षा करना है। एनडीएमए, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों, शिक्षा विभागों, अग्निशमन सेवाओं और स्वास्थ्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर आपदा पूर्व तैयारियों को मजबूत करने की आवश्यकता जताई गई है। अब शिक्षा मंत्रालय द्वारा इस दिशा में विचार किए जाने के बाद देश के शैक्षणिक संस्थानों में आपातकालीन सुरक्षा मानकों को नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
31 अगस्त को लिखा था पत्र
झारखंड के आपदा प्रबंधन मंत्री को पत्र लिखकर राज्य के सभी स्कूलों में आपदा प्रबंधन और आपातकालीन निकासी के लिए एक मजबूत सुरक्षा ढांचा और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने की मांग की थी। इस संबंध में सोशल एक्टिविस्ट ज्योति शर्मा ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का उदाहरण दिया था, जहां प्रिंसिपल के त्वरित निर्णय और सुरक्षा नियमों के पालन की वजह से करीब 1,600 विद्यार्थियों की जान समय रहते बचाई जा सकी। इसी घटना को सबक मानते हुए झारखंड के शैक्षणिक संस्थानों में भी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस नीतियां बनाने की अपील की गई थी।
पत्र में लिखा गया था कि भारत बाढ़, भूकंप, भूस्खलन, आग और आकाशीय बिजली जैसी विभिन्न प्राकृतिक व अन्य आपदाओं के प्रति संवेदनशील है। चूंकि बच्चे दिन का एक बड़ा हिस्सा स्कूलों में बिताते हैं, इसलिए हर स्कूल के लिए एक विशिष्ट आपदा प्रबंधन योजना अनिवार्य की जानी चाहिए। इसके अंतर्गत समय-समय पर मॉक ड्रिल कराने, सुरक्षित निकासी मार्ग तय करने, निर्णय लेने की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने तथा आपातकाल के बाद छात्रों की गिनती और जवाबदेही तय करने जैसे कदम उठाए जाने चाहिए।




