नई दिल्ली/रांची : झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार के जनप्रतिनिधियों के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान सांसदों ने कुड़माली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने और इस विषय पर संसद में चर्चा कराने की मांग को लेकर गृह मंत्री को एक ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष कुड़माली भाषा की ऐतिहासिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक महत्ता को विस्तार से रखा। प्रतिनिधियों ने कहा कि कुड़माली केवल बातचीत का जरिया नहीं है, बल्कि यह लाखों लोगों की सांस्कृतिक पहचान, लोक परंपरा और सामाजिक विरासत से जुड़ी हुई है।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और इस विषय पर सकारात्मक पहल करते हुए जल्द आवश्यक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया। इस प्रतिनिधिमंडल में गिरिडीह (झारखंड) के सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी, पुरुलिया (पश्चिम बंगाल) के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो, जमशेदपुर (झारखंड) के सांसद विद्युत वरण महतो और बिहार से राज्यसभा सांसद खीरू महतो मुख्य रूप से शामिल थे। सांसदों ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार की यह सकारात्मक पहल कुड़माली भाषी समाज के सम्मान, सांस्कृतिक पहचान और विरासत के संरक्षण के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी।
कुड़माली भाषा को संवैधानिक मान्यता क्यों जरूरी?
व्यापक क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा : कुड़माली भाषा पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर के साथ-साथ झारखंड के रांची, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों में बोली और समझी जाती है।
सांस्कृतिक जुड़ाव : इस भाषा का गहरा संबंध झुमर, टुसू, करम और छऊ जैसे समृद्ध लोकगीतों, लोकनृत्यों, पर्व-त्योहारों और पारंपरिक धरोहर से है।
संस्थागत प्रोत्साहन : आठवीं अनुसूची में शामिल होने से कुड़माली भाषा के साहित्य, लेखन, शोध, शिक्षण और संरक्षण को नई दिशा व संस्थागत बढ़ावा मिलेगा।
सांस्कृतिक संरक्षण : यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए भाषा, संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने में मददगार साबित होगा।




