शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने अरुण पति त्रिपाठी को दी अग्रिम बेल , जांच में सहयोग नहीं किया तो ACB बेल रद्द करने के लिए जा सकती है कोर्ट

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड शराब घोटाला मामले में छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के पूर्व प्रबंध निदेशक (MD) अरुण पति त्रिपाठी को अग्रिम जमानत दे दी है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ में अरुण पति त्रिपाठी की याचिका

Supreme court of India

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड शराब घोटाला मामले में छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के पूर्व प्रबंध निदेशक (MD) अरुण पति त्रिपाठी को अग्रिम जमानत दे दी है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ में अरुण पति त्रिपाठी की याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने सुनवाई के बाद उन्हें पहले दी गई अंतरिम राहत को स्थायी अग्रिम जमानत में बदल दिया है।

अदालत ने पाया कि अरुण पति ने जांच अधिकारी के समक्ष पेश होकर जांच में पूरा सहयोग किया है और शीर्ष अदालत के पिछले निर्देशों का पालन किया है. अरुण पति त्रिपाठी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता शिशिर प्रकाश ने पक्ष रखा वहीं राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता पल्लवी लंगर ने बहस की।

अदालत ने अरुण पति त्रिपाठी राहत देते हुए कहा किया कि मुख्य आरोपी विनय कुमार चौबे को पहले ही डिफॉल्ट जमानत मिल चुकी है जबकि सह-आरोपी विनय कुमार सिंह को भी अग्रिम जमानत मिल चुकी है। इसके अलावा अरुण पति त्रिपाठी मूल एफआईआर में नामजद नहीं थे और उन्हें बाद में सह आरोपियों के बयानों के आधार पर मामले में आरोपी बनाया गया।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है अरुण पति त्रिपाठी जांच अधिकारी के बुलाने पर (फोन पर सूचना मिलने सहित) पेश होना होगा और जांच में सहयोग जारी रखना होगा। यदि वे असहयोग करते हैं तो झारखंड सरकार के पास ट्रायल कोर्ट में जाकर उनकी अग्रिम जमानत रद्द कराने की स्वतंत्रता होगी।

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