रांची : झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के निर्देश और न्यायायुक्त सह अध्यक्ष अनिल कुमार मिश्रा-1 के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), रांची द्वारा नशा मुक्ति अभियान के तहत विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। धुर्वा स्थित विवेकानंद विद्या मंदिर स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम में स्कूली छात्र-छात्राओं को नशे के खिलाफ जागरूक किया गया और एनडीपीएस (NDPS) एक्ट-1985 के कड़े प्रावधानों की जानकारी दी गई।
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कार्यक्रम में डिप्टी एलएडीसीएस राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि एनडीपीएस एक्ट के तहत किसी भी प्रकार के प्रतिबंधित मादक पदार्थों का व्यापार, परिवहन, उत्पादन या विनिर्माण कानूनन गंभीर अपराध है। अफीम या पोस्ता की अवैध खेती या कब्जे पर अपराध की गंभीरता और मात्रा के आधार पर 20 साल तक के कठोर कारावास और 2 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है। बार-बार यह अपराध दोहराने पर मृत्युदंड तक का प्रावधान है। उन्होंने छात्रों को बताया कि सीआईपी (CIP) और रिनपास (RINPAS) में डालसा का लीगल एड क्लिनिक संचालित है, जहां नशा पीड़ित व्यक्तियों के इलाज और पुनर्वास के लिए सहायता दी जाती है। उन्होंने नालसा के टोल-फ्री नंबर 15100 और आगामी 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के बारे में भी जानकारी दी।
कार्यक्रम में लाइफ सेवर्स एनजीओ के अतुल गेरा ने कहा कि नशा एक ‘साइलेंट आतंकवाद’ की तरह है, जो युवाओं और समाज को अंदर से खोखला कर रहा है। ड्रग पेडलर्स छात्रों और युवाओं को आसानी से अपने जाल में फंसाते हैं, इसलिए बच्चों को सतर्क रहने और किसी भी तरह के लालच में न आने की जरूरत है। सीआईडी के एसआई रिजवान अंसारी और ड्रग्स कंट्रोल विभाग के असिस्टेंट ड्रग्स निदेशक स्वपनिल निखिल ने छात्रों को बताया कि कैसे नशीले पदार्थों की तस्करी में नाबालिगों का इस्तेमाल किया जा रहा है और सामान्य कफ सिरप जैसी दवाओं का दुरुपयोग नशे के लिए हो रहा है। रोटरी क्लब के रथिन भद्र ने कहा कि पुनर्वास केंद्रों में इलाज के साथ-साथ पीड़ितों को कौशल विकास प्रशिक्षण देकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जाता है। कार्यक्रम के दौरान स्कूल के शिक्षक-शिक्षिकाएं, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, पीएलवी सूरज मुंडा, अमित बड़ाईक और निर्मला कुमारी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।




