नई दिल्ली: भारत के इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात ने मई 2026 में नया इतिहास रच दिया। पहली बार इस क्षेत्र का मासिक निर्यात 12 अरब डॉलर के आंकड़े को पार करते हुए 12.31 अरब डॉलर पर पहुंच गया। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार में बाधाओं के बावजूद इंजीनियरिंग निर्यात में सालाना आधार पर 24.48 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई 2025 में इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात 9.89 अरब डॉलर था, जो इस साल मई में बढ़कर 12.31 अरब डॉलर हो गया। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईईपीसी) इंडिया ने बताया कि मई में देश के कुल माल निर्यात में इंजीनियरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 27.2 प्रतिशत रही।
इन क्षेत्रों के निर्यात ने दी बड़ी मजबूती
इंजीनियरिंग निर्यात में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण इलेक्ट्रिक मशीनरी और उपकरण, जहाज एवं तैरते ढांचे, मोटर वाहन तथा लोहा-इस्पात उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि रही। मई के दौरान इंजीनियरिंग उत्पादों की 34 श्रेणियों में से 28 श्रेणियों में सकारात्मक निर्यात वृद्धि दर्ज की गई, जो इस क्षेत्र की व्यापक मजबूती को दर्शाती है।
चीन पर निर्भरता घटने से भारत को अवसर
ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि वैश्विक कंपनियां अब अपनी सप्लाई चेन को दोबारा व्यवस्थित कर रही हैं, ताकि किसी एक देश, खासकर चीन, पर अत्यधिक निर्भरता कम की जा सके। इससे भारतीय इंजीनियरिंग उद्योग के लिए नए निर्यात अवसर तैयार हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए वाणिज्य मंत्रालय की ओर से तेज नीति समर्थन, सस्ता व्यापार वित्त और बेहतर जोखिम सुरक्षा जैसी सुविधाएं जरूरी होंगी। उनका मानना है कि सरकार के उचित सहयोग से भारत वर्ष 2030 तक 250 अरब डॉलर के इंजीनियरिंग निर्यात का लक्ष्य हासिल कर सकता है।
उत्तर अमेरिका बना सबसे बड़ा बाजार
क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, मई में भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए उत्तर अमेरिका सबसे बड़ा निर्यात बाजार रहा, जहां कुल निर्यात का 19.3 प्रतिशत हिस्सा गया। इसके बाद पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका क्षेत्र की हिस्सेदारी 16.7 प्रतिशत तथा यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी 15.2 प्रतिशत रही।
दिलचस्प बात यह रही कि पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका में भू-राजनीतिक संकट के बावजूद मई में इस क्षेत्र को भारत के इंजीनियरिंग निर्यात में करीब 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं अप्रैल-मई 2026 की अवधि में इस क्षेत्र में निर्यात 14 प्रतिशत बढ़ा।




