रांची : राज्य सरकार द्वारा भर्ती परीक्षाएं और नियुक्तियां निरस्त किए जाने के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी (JPSC) सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति रद्द करने के सरकारी आदेश पर अगले आदेश तक अंतरिम रोक (Stay) लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने चयनित अभ्यर्थियों को तुरंत वापस काम पर लेने का आदेश दिया है।
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बिना उचित प्रक्रिया के हटाना असंवैधानिक : हाईकोर्ट
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने कड़ा रुख अपनाया और कहा कि नैसर्गिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांतों के तहत इन चयनित कर्मियों को इस तरह नहीं हटाया जा सकता। बिना कानून की उचित प्रक्रिया अपनाए इन्हें सेवा से हटाना संवैधानिक रूप से गलत है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस संबंध में 15 सितंबर 2026 तक अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई भी 15 सितंबर को होगी।
इन याचिकाओं पर हुई सुनवाई
अदालत में सरकार की रद्दीकरण अधिसूचना के खिलाफ तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं:
सोनम कुमारी बनाम राज्य सरकार : 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (विज्ञापन संख्या 1/2024) रद्द करने के फैसले को चुनौती।
दीपमाला एवं अन्य बनाम राज्य सरकार : जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा नियुक्ति रद्द करने के खिलाफ याचिका।
सौरभ सिंह एवं अन्य बनाम राज्य सरकार : फूड सेफ्टी ऑफिसर (विज्ञापन संख्या 18/2023) की नियुक्ति रद्द किए जाने के आदेश को चुनौती।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अमृतांश वत्स और अधिवक्ता पीएएस पति ने पक्ष रखा। याचिकाकर्ता सोनम कुमारी ने कोर्ट को बताया कि वे अपनी पुरानी नौकरी छोड़कर यहां सेवा में आई थीं। उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला था और उन्होंने ट्रेनिंग भी पूरी कर ली थी, लेकिन सरकार ने 18 अगस्त को अधिसूचना जारी कर अचानक नियुक्ति रद्द कर दी।
क्या था सरकार का फैसला?
मालूम हो कि सीआईडी (CID) जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार के कार्मिक प्रशासनिक विभाग ने 18 अगस्त की देर रात अधिसूचना जारी कर 22 परीक्षाओं को रद्द, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया को स्थगित और 17 भर्ती परीक्षाओं को जांच के दायरे में शामिल करने की घोषणा की थी। इनमें TDPL से जुड़ी परीक्षाएं और 2014 के बाद की नियुक्तियां शामिल थीं।








