जमशेदपुर : शहर के साकची स्थित जुबली पार्क गेट गोलचक्कर पर मंगलवार को झारखंड आंदोलन के महानायक और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि भावपूर्ण माहौल में मनाई गई। इस अवसर पर उनके सम्मान में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पत्थलगड़ी कर एक शिलापट्ट स्थापित किया गया। कार्यक्रम में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेताओं, कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में समर्थकों ने भाग लेकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान झामुमो नेताओं ने एलान किया कि अब जुबिली पार्क गोलचक्कर दिशोम गुरु शिबू सोरेन के नाम से जाना जाएगा। हालांकि, इस मुद्दे पर अब तक जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति या किसी प्रशासनिक अधिकारी का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
पारंपरिक पूजा-अर्चना और नारों के बीच श्रद्धांजलि
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना से हुई। इसके बाद शिबू सोरेन के नाम का शिलापट्ट स्थापित किया गया। श्रद्धांजलि सभा के दौरान “दिशोम गुरु अमर रहें” और “जोहार शिबू सोरेन” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
अलग झारखंड आंदोलन में शिबू सोरेन का योगदान
सभा को संबोधित करते हुए झामुमो नेताओं ने कहा कि शिबू सोरेन ने अलग झारखंड राज्य के आंदोलन को नई दिशा और पहचान दी। उन्होंने अपने पूरे जीवन में आदिवासियों, मूलवासियों, किसानों, मजदूरों और वंचित समाज के अधिकारों की लड़ाई लड़ी। नेताओं ने संकल्प दोहराया कि उनका संघर्ष और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।
राज्यभर में आयोजित किए गए स्मृति कार्यक्रम
गौरतलब है कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन का 4 अगस्त 2025 को लंबी बीमारी के बाद नई दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया था। पहली पुण्यतिथि के अवसर पर जमशेदपुर सहित राज्य के विभिन्न जिलों में श्रद्धांजलि सभाएं, माल्यार्पण और स्मृति कार्यक्रम आयोजित कर उनके सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान को याद किया गया। इस मौके पर झामुमो के जिलाध्यक्ष विक्टर सोरेन, मीडिया प्रभारी अरुण सिंह राजा, पूर्व सांसद सुमन महतो, प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाडंगी और मोहन कर्मकार सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।



