शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर कांग्रेस की भावभीनी श्रद्धांजलि

रांची : झारखंड आंदोलन के महानायक और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक दिशुम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर रांची में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। बरियातू स्थित वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं लोहरदगा विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में

शिबू सोरेन

रांची : झारखंड आंदोलन के महानायक और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक दिशुम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर रांची में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। बरियातू स्थित वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं लोहरदगा विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शिबू सोरेन के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन और पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं ने “शिबू सोरेन अमर रहे” और “जब तक सूरज चांद रहेगा, दिशुम गुरु तेरा नाम रहेगा” के नारे लगाए। सभी नेताओं ने उनके दिखाए आदर्शों और सामाजिक न्याय के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

1976 में आपातकाल के दौरान हुई थी पहली मुलाकात: डॉ. रामेश्वर उरांव

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए लोहरदगा विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव ने दिशुम गुरु के साथ अपने संस्मरण साझा किए। उन्होंने बताया कि शिबू सोरेन से उनकी पहली मुलाकात 30 जून 1976 को आपातकाल के समय सिद्धू-कान्हू के गांव में हुई थी। वहीं से दोनों के बीच प्रगाढ़ संबंध और मित्रता की शुरुआत हुई, जो जीवन के अंतिम समय तक बनी रही। डॉ. उरांव ने कहा कि शिबू सोरेन ने 1973 में संगठन का निर्माण कर झारखंड आंदोलन को एक नई दिशा दी। कई लोग समय के साथ अपने मूल उद्देश्य से भटक जाते हैं, लेकिन दिशुम गुरु अंतिम समय तक झारखंड, आदिवासी अस्मिता और ‘जल, जंगल, जमीन’ की रक्षा के लिए संघर्षरत रहे। पृथक राज्य के गठन तक उन्होंने आंदोलन को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया।

सामाजिक न्याय और जनसंघर्ष के प्रतीक थे दिशुम गुरु: आलोक कुमार दूबे

प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे ने कहा कि दिशुम गुरु शिबू सोरेन केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता और स्वाभिमान के प्रतीक थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों, आदिवासियों, दलितों और शोषितों के अधिकारों की रक्षा में समर्पित कर दिया। कांग्रेस पार्टी उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए सामाजिक न्याय के लिए निरंतर संघर्ष करेगी। वहीं, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता ने कहा कि दिशुम गुरु का व्यक्तित्व और कृतित्व झारखंड की आत्मा में हमेशा जीवित रहेगा। उन्होंने झारखंडी पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का काम किया।

सभा में प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता, मुख्य प्रवक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव, राजीव रंजन प्रसाद, आदित्य विक्रम जायसवाल, डॉ. तौसीफ, रोहित उरांव, फिरोज रिजवी मुन्ना, सुरेन राम, गौरव सिंह, मेंहुल दूबे, सन्नी कुमार, अनिल सिंह और रोशन लिंडा समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस जन उपस्थित रहे।

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