नई दिल्ली : हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा सबसे पवित्र तिथियों में से एक मानी जाती है। इस दिन गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता प्रकट की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि पर महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास का जन्म हुआ था। इसलिए गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।
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वर्ष 2026 में आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई को शाम 6:18 बजे से शुरू होगी और 29 जुलाई को रात 8:05 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। इसी दिन के बाद भगवान शिव को समर्पित पवित्र सावन मास का आरंभ होगा।
गुरु पूर्णिमा 2026 के शुभ मुहूर्त
गुरु पूर्णिमा के दिन स्नान, पूजा और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं :
- ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4:17 बजे से 4:59 बजे तक
- लाभ-उन्नति मुहूर्त : सुबह 5:41 बजे से 7:22 बजे तक
- अमृत मुहूर्त : सुबह 7:22 बजे से 9:04 बजे तक
- शुभ मुहूर्त : सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक
- चर मुहूर्त : दोपहर 3:51 बजे से शाम 5:32 बजे तक
- लाभ मुहूर्त : शाम 5:32 बजे से 7:14 बजे तक
धार्मिक मान्यता है कि इन शुभ मुहूर्तों में स्नान, पूजा और दान करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
भारतीय संस्कृति में गुरु को जीवन का मार्गदर्शक माना गया है। गुरु अपने ज्ञान और अनुभव से शिष्य को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शिष्य अपने गुरु का पूजन करते हैं, उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और श्रद्धानुसार गुरु दक्षिणा अर्पित करते हैं।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु ग्रह से संबंधित दोष हों, तो गुरु पूर्णिमा के दिन स्नान-दान, गुरुजनों की सेवा और पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस दिन गुरु का सम्मान करने से जीवन में ज्ञान, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने की मान्यता है।



