नई दिल्ली। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर अंतरिक्ष में उगाई गई मिर्च की तस्वीरें साझा की हैं। नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर द्वारा जारी इन तस्वीरों के साथ कहा गया, “बागवानी सिर्फ धरती पर ही नहीं होती।” यह प्रयोग भविष्य में चंद्रमा और मंगल ग्रह पर लंबे मानव मिशनों की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
नासा ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा की गई तस्वीरों में एक्सपीडिशन-66 के अंतरिक्ष यात्री थॉमस मार्शबर्न को आईएसएस के एडवांस्ड प्लांट हैबिटेट में उग रही मिर्च का निरीक्षण करते हुए दिखाया है। दूसरी तस्वीर में कोलंबस मॉड्यूल के भीतर लाल-गुलाबी एलईडी रोशनी के बीच उगी मिर्च दिखाई दे रही है। यह प्लांट हैबिटेट-04 प्रयोग का हिस्सा है।
आईएसएस पर नासा ने ‘वेजी’ नामक एक छोटा स्पेस गार्डन विकसित किया है, जिसमें एक साथ छह पौधे उगाए जा सकते हैं। माइक्रोग्रैविटी में खेती आसान नहीं होती, क्योंकि पानी बूंदों के रूप में तैरने लगता है। इस चुनौती से निपटने के लिए विशेष ‘प्लांट पिलो’ का उपयोग किया जाता है, जिनमें मिट्टी, पोषक तत्व, पानी और हवा का संतुलित मिश्रण होता है। पौधों की वृद्धि के लिए लाल और नीली एलईडी लाइटें लगाई गई हैं।
अब तक इस स्पेस गार्डन में लेट्यूस की तीन किस्में, चाइनीज कैबेज, मिजुना सरसों, रेड रशियन केल और जिनिया के फूल सफलतापूर्वक उगाए जा चुके हैं। इनमें से कुछ सब्जियां अंतरिक्ष यात्रियों ने खाई हैं, जबकि कुछ नमूनों को वैज्ञानिक अध्ययन के लिए पृथ्वी पर भेजा गया।
नासा का कहना है कि अंतरिक्ष में पौधे केवल भोजन का स्रोत नहीं हैं, बल्कि वे अंतरिक्ष यात्रियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। ताजा भोजन, हरियाली और प्राकृतिक वातावरण लंबे अंतरिक्ष मिशनों के दौरान तनाव कम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, भविष्य में पौधे अंतरिक्ष विकिरण (रेडिएशन) से सुरक्षा देने में भी सहायक हो सकते हैं।
नासा का एडवांस्ड प्लांट हैबिटेट 180 से अधिक सेंसरों से लैस है, जो पृथ्वी पर मौजूद वैज्ञानिकों को लगातार जानकारी भेजते रहते हैं। इस प्रणाली में बौनी गेहूं और मिर्च जैसे पौधों का सफल परीक्षण किया जा चुका है। भविष्य में टमाटर, बेरी और अन्य फसलों की खेती पर भी प्रयोग किए जाएंगे।




