रांची : इंडियन कैथोलिक प्रेस एसोसिएशन (आईसीपीए) ने झारखंड के जाने-माने पत्रकार, लेखक और मानवाधिकार कार्यकर्ता ग्लैडसन डुंगडुंग को ‘आईसीपीए-एसवीडी स्वामी देवानंद चाक्कुंगल हिंदी पत्रकारिता पुरस्कार’ देने की घोषणा की है। यह सम्मान उन्हें हिंदी पत्रकारिता में उनके निरंतर योगदान और आदिवासियों, स्वदेशी समुदायों व हाशिए पर पड़े वर्गों के अधिकारों पर निडर रिपोर्टिंग के लिए दिया जा रहा है।
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विस्थापन और मानवाधिकारों पर 500 से अधिक लेख
ग्लैडसन डुंगडुंग ने विस्थापन, भूमि अधिकार, आदिवासी अधिकारों और सामाजिक परिवर्तन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर व्यापक काम किया है। उन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार पत्रों में 500 से अधिक लेख और रिपोर्ट प्रकाशित किए हैं। इसके अलावा, उन्होंने पुलिस अत्याचार और मानवाधिकार उल्लंघनों के मामलों में जमीनी स्तर पर फैक्ट-फाइंडिंग की है तथा कानूनी मदद के जरिए कई मामलों में प्रभावी हस्तक्षेप किया है।
35 पुस्तकों के लेखक और ‘आदिवासी हुंकार’ के संस्थापक
डुंगडुंग ने जल, जंगल, जमीन और विस्थापन जैसे विषयों पर हिंदी और अंग्रेजी में 35 पुस्तकें लिखी हैं। इनमें ‘एंडलेस क्राई इन द रेड कॉरिडोर’, ‘मिशन सारंडा’ और ‘हूज कंट्री इज इट एनीवे?’ जैसी चर्चित किताबें शामिल हैं। वे ‘झारखंड ह्यूमन राइट्स रिपोर्ट’ के संपादक भी रहे हैं और उन्होंने आदिवासियों के पक्ष को मजबूती देने के लिए ‘आदिवासी हुंकार’ नामक वैकल्पिक मीडिया मंच की स्थापना की है। आईसीपीए ने उन्हें इस उपलब्धि पर बधाई दी है।




