नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बोफोर्स रिश्वत मामले से जुड़ी आखिरी याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही लगभग 40 साल पुराने इस बहुचर्चित मामले में कानूनी कार्यवाही पूरी तरह से समाप्त हो गई है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने वकील अजय के अग्रवाल की उस अपील को सुनने से इनकार कर दिया, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के 2005 के फैसले को चुनौती दी गई थी।
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अतिरिक्त समय देने से किया इनकार
अदालत में याचिकाकर्ता ने श्रीचंद पी हिंदूजा और गोपीचंद पी हिंदूजा के निधन के बाद उनके नाम हटाने के लिए और समय मांगा था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस मांग को ठुकराते हुए कहा कि मामले को अब और लंबा नहीं खींचा जा सकता। पीठ ने स्पष्ट किया कि जब दिल्ली हाई कोर्ट पहले ही सभी आरोप रद्द कर चुका है और सीबीआई की अर्जी भी पूर्व में खारिज हो चुकी है, तो इस मामले को आगे जारी रखने का कोई औचित्य नहीं बनता।
1986 के तोप सौदे से जुड़ा था विवाद
यह मामला 24 मार्च 1986 को भारत सरकार और स्वीडिश कंपनी ‘एबी बोफोर्स’ के बीच हुए 1,437 करोड़ रुपये के सौदे से जुड़ा था, जिसके तहत भारतीय सेना के लिए 400 तोपें खरीदी जानी थीं। साल 1987 में स्वीडिश रेडियो द्वारा सौदे में दलाली और रिश्वतखोरी के दावों के बाद यह मामला देश का सबसे बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद बन गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम आदेश के बाद बोफोर्स केस से जुड़े सभी अध्याय हमेशा के लिए बंद हो गए हैं।




