जैन मंदिर में 9 वेदियों का शिलान्यास, तीन दिवसीय आयोजन कल से

झुमरीतिलैया : श्री दिगंबर जैन समाज के सान्निध्य में झुमरीतिलैया स्थित श्री बड़े मंदिर जी के नवनिर्मित जैन मंदिर में 9 वेदियों के भव्य शिलान्यास समारोह का आयोजन किया जाएगा। तीन दिवसीय यह धार्मिक कार्यक्रम 28 से 30 अगस्त 2026 तक परम पूज्य आचार्य शिरोमणि

जैन मंदिर
नवनिर्मित जैन मंदिर में भव्य शिलान्यास समारोह।

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झुमरीतिलैया : श्री दिगंबर जैन समाज के सान्निध्य में झुमरीतिलैया स्थित श्री बड़े मंदिर जी के नवनिर्मित जैन मंदिर में 9 वेदियों के भव्य शिलान्यास समारोह का आयोजन किया जाएगा। तीन दिवसीय यह धार्मिक कार्यक्रम 28 से 30 अगस्त 2026 तक परम पूज्य आचार्य शिरोमणि पट्टाचार्य 108 श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद तथा उनके परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री 108 सुयश सागर जी महाराज और मुनि श्री 108 कौशल्य सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में होगा। आयोजकों के अनुसार, पूरे भारत में पहली बार एक साथ 9 वेदियों के भव्य शिलान्यास का आयोजन किया जा रहा है। इसे लेकर जैन समाज में विशेष उत्साह है।

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16 दिवसीय शांतिनाथ विधान का होगा समापन

शिलान्यास समारोह से पहले 13 अगस्त से चल रहे 16 दिवसीय शांतिनाथ विधान का समापन 28 अगस्त को होगा। इस दौरान प्रातः पूजन, अभिषेक और शांतिधारा के साथ रक्षाबंधन पर्व की पूजन, विष्णु कुमार मुनि की पूजन तथा देवाधिदेव 1008 श्रेयांश नाथ भगवान के निर्वाण महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद शांतिविधान के समापन हवन की धार्मिक क्रियाएं संपन्न होंगी। समापन के बाद घट यात्रा निकाली जाएगी, जो नगर भ्रमण करते हुए कार्यक्रम स्थल पहुंचेगी। यहां तीन दिवसीय शिलान्यास समारोह का ध्वजारोहण किया जाएगा।

121 अर्घ्य और 32 इंद्रों ने चढ़ाया श्रीफल

गुरुवार को 16 दिवसीय विधान मंडप में 121 अर्घ्य पुण्यार्जक परिवारों के साथ 32 इंद्रों द्वारा श्रीफल चढ़ाया गया। इस अवसर पर मुनि श्री 108 सुयश सागर जी महाराज ने प्रवचन में शांतिविधान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि साल में ऐसे अवसर बहुत कम आते हैं, जब लगातार 16 दिनों तक शांतिविधान, पूजन और धार्मिक कार्य किए जाते हैं। इस शुक्ल पक्ष के पखवाड़े में 16 दिनों तक विधान और धर्म कार्य करने से अधिक पुण्य अर्जित होता है। मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य के जीवन में पुण्य का उदय होने पर उसे धन-संपत्ति मिल सकती है, लेकिन उसका उपयोग वह किस तरह करता है, यह उसके कर्मों को प्रभावित करता है। कोई व्यक्ति धन को पुण्य कार्यों में लगाता है, जबकि कोई उसे जुआ और शराब जैसी गतिविधियों में खर्च कर देता है। ऐसे कर्मों का परिणाम उसे आगे भोगना पड़ता है।

नई आहारशाला का भी हुआ उद्घाटन

विधान के बाद आहार चर्या सुरेश जैन और नरेंद्र जैन झांझरी परिवार को प्राप्त हुई। वहीं, मुनि श्री 108 सुयश सागर जी महाराज के आशीर्वाद से दोपहर 12 बजे बड़े जैन मंदिर परिसर में नवनिर्मित आहारशाला का उद्घाटन जैन महिला समाज की ओर से किया गया। शाम को गुरुमुख से णमोकार चालीसा का पाठ भी किया गया। तीन दिवसीय कार्यक्रम को लेकर श्री दिगंबर जैन समाज, विरागोदय वर्षायोग समिति और नव निर्माण कमेटी के पदाधिकारी एवं समाज के लोग तैयारियों में जुटे हैं। सभी कार्यक्रमों में समाज के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।

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