पहली तिमाही में एलपीजी पर 13,700 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी
रिपोर्ट के अनुसार, देश की तीन प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में एलपीजी की बिक्री पर करीब 13,700 करोड़ रुपये की संयुक्त अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ा। इसमें सरकार की ओर से मिली 7,500 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति को समायोजित किया गया है।कंपनियां घरेलू उपभोक्ताओं को बाजार मूल्य से कम कीमत पर रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध करा रही थीं। अंतरराष्ट्रीय खरीद लागत और घरेलू बिक्री मूल्य के बीच बड़े अंतर के कारण कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ा।
48,200 करोड़ से बढ़कर 61,900 करोड़ रुपये हुई कुल अंडर-रिकवरी
केयरएज रेटिंग्स के मुताबिक, कुल एलपीजी अंडर-रिकवरी 31 मार्च 2026 के 48,200 करोड़ रुपये से बढ़कर 30 जून 2026 तक 61,900 करोड़ रुपये हो गई।रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तेज वृद्धि के पीछे पश्चिम एशिया में संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक एलपीजी आपूर्ति शृंखला में आई बड़ी बाधाएं मुख्य कारण रहीं। इसके चलते आयात लागत और घरेलू खुदरा बिक्री मूल्य के बीच अंतर बढ़ गया।
सऊदी एलपीजी बेंचमार्क में करीब 50 फीसदी उछाल
अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतों के प्रमुख बेंचमार्क सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (सऊदी सीपी) में भी तेज वृद्धि हुई। वित्त वर्ष 2025-26 में इसका औसत स्तर 530 डॉलर प्रति मीट्रिक टन था, जो वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में बढ़कर 785 डॉलर प्रति मीट्रिक टन पहुंच गया। यानी इसमें करीब 50 फीसदी की वृद्धि हुई।हालांकि, बाद में वैश्विक आपूर्ति स्थिति में सुधार आने के साथ कीमतों में नरमी देखने को मिली। जुलाई 2026 में सऊदी सीपी घटकर 592 डॉलर प्रति मीट्रिक टन और अगस्त 2026 में 632 डॉलर प्रति मीट्रिक टन पर आ गया।
भारत की करीब 60 फीसदी एलपीजी जरूरत आयात से पूरी होती है
भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 फीसदी आयात करता है। पश्चिम एशिया से आपूर्ति प्रभावित होने के बाद देश ने अमेरिका और अन्य बाजारों से एलपीजी की खरीद बढ़ाई।हालांकि, वैकल्पिक स्रोतों से आयात करने के कारण कंपनियों की लैंडेड कॉस्ट यानी भारत तक एलपीजी पहुंचने की कुल लागत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। इससे ओएमसी पर वित्तीय दबाव और बढ़ गया।
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 89 रुपये की बढ़ोतरी
बढ़ती खरीद लागत के असर को कम करने के लिए सरकार और तेल कंपनियों ने घरेलू एलपीजी कीमतों में भी बदलाव किया। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 89 रुपये की बढ़ोतरी की गई।इसका उद्देश्य एलपीजी की बढ़ी हुई लागत और अंडर-रिकवरी के कुछ बोझ को कम करना था।
दूसरी तिमाही में अंडर-रिकवरी घटने की उम्मीद
रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2026 से अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतों में गिरावट शुरू होने के कारण तेल कंपनियों की खरीद लागत में कमी आई है। इससे वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में एलपीजी अंडर-रिकवरी में करीब 40 फीसदी की क्रमिक कमी आने की उम्मीद है।
इससे आने वाले महीनों में सरकारी तेल विपणन कंपनियों की लाभप्रदता पर दबाव कुछ कम हो सकता है।








