चुनाव आयोग ‘वन-मैन शो’ बन गया, ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करें : विनोद पांडेय

रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने द इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आए तथ्यों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग तीन सदस्यों की संवैधानिक संस्था है, किसी

विनोद कुमार पांडेय

अपनी भाषा में पढ़ें

रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने द इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आए तथ्यों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग तीन सदस्यों की संवैधानिक संस्था है, किसी एक व्यक्ति का निजी कार्यालय नहीं।

also read : बार-बार संविधान पीठ बनाने की जरूरत खत्म हो, SC के जजों ने CJI को दिया स्थायी पांच सदस्यीय बेंच बनाने का सुझाव

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार ऐसे फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ति जताई, जिनकी जानकारी उन्हें नहीं थी। दो चुनाव आयुक्त बार-बार लिखित आपत्ति दर्ज कराएं और फिर भी फैसले होते रहें, तो सवाल उठेगा ही कि चुनाव आयोग चला कौन रहा था ?

उन्होंने कहा कि यह सामान्य प्रशासनिक मतभेद नहीं है। यह चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता का सवाल है। CEC ज्ञानेश कुमार को देश के सामने बताना चाहिए कि दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर क्या कार्रवाई हुई और उनकी जानकारी के बिना फैसले कैसे लिए गए।

झामुमो के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल पहली बार नहीं उठा है। ज्ञानेश कुमार की मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्ति के समय ही झामुमो सहित देश की सभी विपक्षी पार्टियों और कानून के जानकारों ने सवाल उठाया था।

महासचिव श्री पांडेय ने कहा कि SIR के नाम पर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव, सॉफ्टवेयर के केंद्रीकरण और पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने में सामने आई कथित तकनीकी बाधाएं बेहद गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची किसी सरकार की कृपा नहीं, नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार की बुनियाद है। एक भी पात्र नागरिक को मताधिकार से वंचित करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि झामुमो ने शुरुआत से SIR पर नहीं बल्कि एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। महाराष्ट्र एवं बिहार के बाद पश्चिम बंगाल में भी उठे सवालों ने चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर संदेह पैदा किया है। इन तीनों राज्यों में एसआईआर की आड़ में लाखों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काटे गए और लोकतंत्र की हत्या कर भाजपा की सरकार स्थापित कराई गई। अब यह देश का हर नागरिक समझ चुका है।

also read : खादगढ़ा बस टर्मिनल में अब निगम वसूलेगा टोल शुल्क, टीम तैनात

उन्होंने कहा ज्ञानेश कुमार बताएं कि 10 महीने में 14 आपत्तियां क्यों आईं? क्या प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इन आपत्तियों की जानकारी थी? यदि थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?” उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक सत्ता के प्रभाव से मुक्त रखना लोकतंत्र की पहली शर्त है। लेकिन, ये बातें भाजपा की सरकार ने मजाक बन कर रह गई है।

विनोद पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट से पूरे मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को ‘वन-मैन शो’ नहीं बनने दिया जा सकता। चुनाव आयोग किसी सरकार या व्यक्ति की नहीं, संविधान और देश के करोड़ों मतदाताओं की संस्था है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने की पुरजोर मांग की है।
also read :रांची में पर्यूषण पर्व का आठवां दिन मनाया गया, उत्तम त्याग पर प्रवचन

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
संबंधित खबरें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *