नई दिल्ली: भारत का मखाना (फॉक्स नट) क्षेत्र आने वाले वर्षों में तेजी से विस्तार कर सकता है। केंद्र सरकार की ओर से जारी आधिकारिक फैक्टशीट के मुताबिक, बढ़ते उत्पादन, मजबूत घरेलू मांग, बेहतर कीमतों और निर्यात में वृद्धि के चलते देश का मखाना बाजार 2029-30 तक 11,000 से 12,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। फैक्टशीट के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच मखाने के उत्पादन में करीब 4 से 5 प्रतिशत की ही वृद्धि हुई, लेकिन इसी अवधि में इसकी औसत कीमत लगभग 500 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 1,250 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग, प्रीमियम ब्रांडिंग और सीमित आपूर्ति वृद्धि को कीमतों में तेजी की प्रमुख वजह माना गया है। मखाना स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच लगातार लोकप्रिय हो रहा है। कम वसा, बेहतर पोषण और प्लांट-बेस्ड खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में इसकी खपत को बढ़ाया है।
उत्पादन और उत्पादकता में लगातार बढ़ोतरी
वर्ष 2024-25 में भारत का कुल मखाना उत्पादन 63,910 मीट्रिक टन रहा। इस दौरान औसत उत्पादकता 2.03 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई।वहीं, 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार मखाना उत्पादन बढ़कर 80,590 मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है। इसी अवधि में औसत उत्पादकता बढ़कर 2.34 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर होने का अनुमान है।मखाना उत्पादन में बिहार देश का सबसे प्रमुख राज्य है। वर्ष 2025-26 में राज्य में करीब 60,000 मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है। बिहार में औसत उत्पादकता लगभग 2 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है और राज्य देश के कुल उत्पादन में सबसे बड़ा योगदान देता है।
आधुनिक तकनीकों से किसानों को मिल रहा फायदा
पारंपरिक रूप से मखाने की खेती तालाबों और जलाशयों में की जाती रही है। हालांकि, आधुनिक कृषि तकनीकों के इस्तेमाल से अब उत्पादन क्षमता में सुधार हो रहा है। फील्ड सिस्टम खेती के साथ स्वर्ण वैदेही और सबौर मखाना-1 जैसी उन्नत किस्मों के इस्तेमाल से किसानों को बेहतर पैदावार मिल रही है। सरकार के अनुसार, खेती के क्षेत्र में विस्तार, उत्पादकता बढ़ने और खेती से जुड़े जोखिम कम होने से मखाना क्षेत्र में लगातार प्रगति हो रही है।भारत हर साल 0.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक मखाने का उत्पादन करता है। इसमें से करीब 40 प्रतिशत, यानी लगभग 23,000 से 25,000 मीट्रिक टन मखाना निर्यात किया जाता है। बाकी उत्पादन की खपत घरेलू बाजार में होती है।
निर्यात और सरकारी योजनाओं से नई उम्मीद
दुनिया भर में क्लीन-लेबल और प्लांट-बेस्ड सुपरफूड्स की मांग बढ़ रही है। ऐसे में भारत का मजबूत उत्पादन आधार मखाने को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रीमियम स्नैक के तौर पर स्थापित करने में मदद कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, निर्यात के नए अवसर इस क्षेत्र की वृद्धि को और गति दे सकते हैं।फैक्टशीट के मुताबिक, घरेलू मखाना बाजार ने 2021-22 से 2024-25 के दौरान 17 से 18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की। मजबूत घरेलू मांग ने इस क्षेत्र को वैश्विक बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव से भी काफी हद तक सुरक्षित रखा है। मखाना क्षेत्र के बढ़ते महत्व को देखते हुए केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड स्थापित करने की घोषणा की थी। इसके अलावा, 2025-26 से 2030-31 की अवधि के लिए 476.03 करोड़ रुपये की लागत वाली मखाना विकास केंद्रीय क्षेत्र योजना को भी मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत अनुसंधान एवं नवाचार, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, किसानों के कौशल विकास, कटाई और कटाई-पश्चात प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, विपणन और निर्यात को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाएगा। साथ ही मखाने की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था को भी मजबूत करने की योजना है।








