रांची : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने स्किल डेवलपमेंट मिशन को लेकर भाजपा की ओर से लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार और तथ्यों से परे बताया है। उन्होंने कहा कि भाजपा राजनीतिक हताशा में झूठे आरोप लगाकर अपनी विफलताओं और भ्रष्टाचार के मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
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उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार भाजपा पहले ही खो चुकी है। आलोक कुमार दूबे के अनुसार, “चंदा दो–धंधा लो” की नीति के तहत इलेक्टोरल बॉन्ड योजना के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये का चंदा लेने वाली पार्टी आज ईमानदारी की बात कर रही है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद भाजपा को देश की जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन कंपनियों से चंदा लिया गया और बदले में उन्हें क्या लाभ दिए गए।
भाजपा पर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर निशाना
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि भाजपा के तत्कालीन दिवंगत राष्ट्रीय अध्यक्ष कैमरे के सामने रिश्वत लेते हुए पकड़े गए थे। उनका कहना था कि जिस दल का शीर्ष नेतृत्व ही भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा रहा हो, वह झारखंड की जनता को ईमानदारी का उपदेश नहीं दे सकता। उन्होंने इसे राजनीतिक पाखंड बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के शासनकाल में देश और झारखंड में खनन, कोयला, भूमि, भर्ती समेत कई मामलों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए। उनके अनुसार, बड़े आर्थिक घोटालों पर भाजपा ने हमेशा चुप्पी साधी, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए निराधार आरोप लगाने से पीछे नहीं हटती।
इलेक्टोरल बॉन्ड और कॉरपोरेट गठजोड़ पर सवाल
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि भाजपा के कुछ नेता हमेशा चुनिंदा उद्योगपतियों के हितों की रक्षा करते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की संपत्तियों, बंदरगाहों, हवाई अड्डों और अन्य रणनीतिक परिसंपत्तियों को लेकर उठे सवालों पर भाजपा कोई जवाब नहीं देती, जबकि झारखंड को बदनाम करने का कोई मौका नहीं छोड़ती।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि भाजपा की राजनीति झूठ, भ्रम और दुष्प्रचार पर आधारित है। उनका कहना था कि जब भी महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दों पर जवाब देने की स्थिति नहीं होती, तब भाजपा विपक्ष पर आरोप लगाने लगती है।
उन्होंने कहा कि भाजपा आज भ्रष्टाचार की जिस भाषा का इस्तेमाल कर रही है, उसी पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष घूस लेते हुए कैमरे में पकड़े गए थे। उन्होंने दावा किया कि इलेक्टोरल बॉन्ड योजना के जरिए भाजपा को 8,000 करोड़ रुपये से अधिक का चंदा मिला, जिसमें बड़ी संख्या में कॉरपोरेट कंपनियों का योगदान था। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने भाजपा से इस चंदे की परिस्थितियों पर जवाब देने की मांग की।
आलोक कुमार दूबे ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार पर समय-समय पर यह आरोप लगते रहे हैं कि उसने देश की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों और संसाधनों को चुनिंदा कॉरपोरेट घरानों, विशेषकर गौतम अडानी समूह, को लाभ पहुंचाने वाली नीतियां अपनाईं। उन्होंने कहा कि भाजपा पहले इलेक्टोरल बॉन्ड, कॉरपोरेट गठजोड़ और अपने नेताओं पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर देश की जनता को जवाब दे, उसके बाद झारखंड सरकार पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, झारखंड की जनता भाजपा के दोहरे चरित्र को पहचान चुकी है और ऐसे दुष्प्रचार का जवाब देगी।




