नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। हालांकि, विपक्ष के लगातार हंगामे और नारेबाजी के बीच सदन की कार्यवाही बाधित रही और लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार की ओर से यह विधेयक लोकसभा में पेश किया। सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षा में धांधली और अन्य अनुचित गतिविधियों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाना तथा सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूत करना है।
विधेयक पेश किए जाने के दौरान विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी जारी रखी। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण विधेयक है, जिसका देश लंबे समय से इंतजार कर रहा था।
अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, “कई दिनों से आप इस विषय पर चर्चा की मांग कर रहे थे और आज सरकार इस पर चर्चा के लिए तैयार है। आप जो भी सुझाव देंगे, सरकार उन पर विचार करेगी। लोकतंत्र में नारेबाजी नहीं, बल्कि चर्चा और बहस के माध्यम से समाधान निकलता है। क्या आप इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा नहीं करना चाहते?”
इसके बावजूद विपक्ष का हंगामा जारी रहा, जिसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी।
यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन का प्रस्ताव करता है। संशोधित कानून के तहत परीक्षा में पेपर लीक और संगठित धोखाधड़ी में शामिल दोषियों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
प्रस्तावित संशोधन के प्रमुख प्रावधानों में दोषियों के लिए 10 वर्ष तक के कारावास, 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने, अपराध में संलिप्त व्यक्तियों की संपत्ति जब्त करने तथा ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था शामिल है। सरकार का प्रस्ताव है कि फास्ट ट्रैक अदालतें ऐसे मामलों की सुनवाई पूरी कर तीन महीने के भीतर फैसला सुनाएं, ताकि छात्रों को शीघ्र न्याय मिल सके और परीक्षा प्रणाली में लोगों का विश्वास मजबूत हो।
इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल इस संशोधन विधेयक को मंजूरी दे चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में घोषणा की थी कि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक कानून संसद में लाया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस संशोधन के माध्यम से सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ-साथ छात्रों के भविष्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।




