रांची। प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे ने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि फैसले कैबिनेट में नहीं होंगे तो क्या बाबूलाल मरांडी के कार्यालय में होंगे? सीएम हेमंत सोरेन के नेतृत्व में हुई कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने तथा जेपीएससी की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए उच्चस्तरीय कमिटी के गठन का निर्णय युवाओं के विश्वास को बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
आलोक दूबे ने कहा कि सरकार ने इस फैसले के माध्यम से अपना दृष्टिकोण और प्रतिबद्धता पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। बच्चों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाला कोई भी व्यक्ति बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि छात्रों ने सीएम हेमंत सोरेन और राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे लगाए हैं, यह देखकर भाजपा के कलेजे में सांप लोटना स्वाभाविक है। भाजपा को युवाओं के हित में लिए गए सकारात्मक फैसले का स्वागत करना चाहिए, न कि उसमें राजनीति तलाशनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जहां तक सीबीआई जांच की बात है, पूरा देश देख चुका है कि सीबीआई सहित कई लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। केंद्र सरकार पर संस्थाओं के दुरुपयोग के आरोप किसी से छिपे नहीं हैं। बाबूलाल मरांडी को सीबीआई की मांग करने से पहले भाजपा शासित राज्यों में चल रहे छात्र और युवा आंदोलनों पर भी ध्यान देना चाहिए।
कहा कि आज देश के अलग-अलग हिस्सों में, विशेषकर भाजपा शासित प्रदेशों में, युवा अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर सड़कों पर हैं। भाजपा नेताओं को दूसरे राज्यों के आंदोलनों पर भी रोशनी डालनी चाहिए और युवाओं की आवाज सुननी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश के ऐसे नेता हैं जो सच को सच कहने की हिम्मत रखते हैं और युवाओं के सवालों को मजबूती से उठाते हैं। दिल्ली में छात्रों और युवाओं पर जिस तरह कथित रूप से बर्बरता हुई, उसके लिए जिम्मेदार लोगों से माफी मांगना तो दूर, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में भी इन सवालों का सामना करने से बचते हैं।
प्रदेश कांग्रेस महासचिव ने कहा कि झारखंड सरकार ने छात्रों के हित में ठोस निर्णय लेकर यह साबित किया है कि युवाओं के भविष्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। भाजपा को अब राजनीति करने के बजाय छात्रों के हित में लिए गए फैसलों का समर्थन करना चाहिए।








