रांची : झारखंड सरकार ने राज्य में गंभीर बीमारियों के इलाज और कैंसर जांच से जुड़ी स्वास्थ्य योजनाओं को गति देने के लिए 8 जिलों को 16 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जारी की है। यह फंड वित्तीय वर्ष 2026-27 में खर्च किया जाएगा। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
Read more : जेल अदालत से खुली मुक्ति की राह, 10 बंदियों की हुई रिहाई
इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से तीन प्रमुख योजनाओं—’मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना’, ‘मुख्यमंत्री निःशुल्क डायग्नोस्टिक एवं रेडियोलॉजी जांच योजना’ और ‘मुख्यमंत्री निःशुल्क सर्वाइकल कैंसर एवं ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग योजना’ के तहत किया जाएगा।
गंभीर बीमारी के इलाज के लिए मिलेगी आर्थिक मदद
मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत उन नागरिकों को आर्थिक सहायता दी जाएगी, जिनकी पिछले तीन वर्षों की लगातार वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम है। इस पात्रता शर्त को पूरा करने वाले मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए सरकार की ओर से वित्तीय मदद प्रदान की जाएगी।
किस जिले को कितना मिला बजट?
सरकार द्वारा जारी किए गए 16 करोड़ रुपये का जिलावार आवंटन इस प्रकार है :
गिरिडीह: 3 करोड़ रुपये
जामताड़ा: 3 करोड़ रुपये
चतरा: 2 करोड़ रुपये
धनबाद: 2 करोड़ रुपये
रांची: 2 करोड़ रुपये
पूर्वी सिंहभूम: 1.50 करोड़ रुपये
सरायकेला-खरसावां: 1.50 करोड़ रुपये
साहिबगंज: 1 करोड़ रुपये
मुफ़्त कैंसर जांच और डायग्नोस्टिक सुविधाओं पर जोर
आवंटित बजट का एक बड़ा हिस्सा सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर की मुफ्त स्क्रीनिंग (जांच) अभियान को आगे बढ़ाने में इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, अस्पतालों में आने वाले मरीजों को मुफ्त डायग्नोस्टिक और रेडियोलॉजी जांच की निर्बाध सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भी इस फंड का उपयोग किया जाएगा।
हर महीने देना होगा खर्च का ब्योरा
राज्य सरकार ने राशि के पारदर्शी इस्तेमाल को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय की है। संबंधित जिलों के सिविल सर्जन ही राशि की निकासी और उसके सही उपयोग के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होंगे। विभाग ने सभी 8 जिलों को निर्देश दिया है कि वे हर महीने खर्च की गई राशि का उपयोगिता प्रमाण-पत्र (Utilization Certificate) अनिवार्य रूप से जमा करें। यह प्रमाण-पत्र प्रत्येक माह की 7 तारीख तक स्वास्थ्य विभाग की बजट शाखा को भेजना होगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि उपयोगिता प्रमाण-पत्र मिलने के बाद ही आगे के खर्च की प्रक्रिया को हरी झंडी दी जाएगी।








