नई दिल्ली : आंध्र प्रदेश के डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा जिले के सात मछुआरे 25 दिन बाद शुक्रवार को सुरक्षित घर लौट आए। ये सभी 3 अगस्त को मछली पकड़ने के लिए समुद्र में गए थे और कुछ दिनों बाद परिवार से उनका संपर्क टूट गया था। पश्चिम बंगाल तट के पास शंकरपुर मछली पकड़ने के बंदरगाह के नजदीक बुधवार को उनकी नाव और सभी मछुआरे सुरक्षित मिले। इसके बाद अधिकारियों की मदद से उन्हें काकीनाडा लाया गया।
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3 अगस्त को समुद्र में गए थे मछुआरे
सातों मछुआरे 3 अगस्त को ओडलरेवु मछली उतारने के स्थान से एक मशीनीकृत नाव पर सवार होकर निकले थे। वे टूना मछली की तलाश में आंध्र प्रदेश के तट से दूर गहरे समुद्र में गए थे। समुद्र में जाने के करीब चार दिन बाद उनका अपने परिवारों से संपर्क टूट गया। मछुआरों को 12 अगस्त को वापस लौटना था। लेकिन तय समय पर उनके नहीं लौटने के बाद परिवार के लोग चिंतित हो गए और उन्होंने अधिकारियों से संपर्क किया। मछुआरों की तलाश के लिए मंगलवार को अभियान तेज किया गया। इस दौरान 15 तटरक्षक जहाजों और चार हेलीकॉप्टरों को खोज अभियान में लगाया गया। केंद्र सरकार के सहयोग से भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी), नौसेना और अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। इसी अभियान के बीच बुधवार दोपहर पश्चिम बंगाल तट के पास शंकरपुर मछली पकड़ने के बंदरगाह के नजदीक स्थानीय मछुआरों ने लापता नाव को खोज लिया।
मोबाइल फोन मिलने के बाद परिवार से हुई बात
स्थानीय मछुआरों ने लापता मछुआरों को एक मोबाइल फोन उपलब्ध कराया। इसके जरिए उन्होंने आंध्र प्रदेश में अपने परिवार के सदस्यों से बात की और अपने सुरक्षित होने की जानकारी दी। मछुआरों ने बताया कि नाव के इंजन में तकनीकी खराबी आने के बाद वे समुद्र में फंस गए थे। पश्चिम बंगाल के तट तक पहुंचने से पहले उन्हें समुद्र में तीन दिनों से अधिक समय तक बिना भोजन के रहना पड़ा। अधिकारियों ने सभी मछुआरों को पश्चिम बंगाल से वापस लाने में मदद की। शुक्रवार को काकीनाडा पहुंचने पर विधायक वी. कोंडाबाबू, एमएलसी राजशेखर और जिला अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। लापता मछुआरों की पहचान कोपानाथी रामकृष्ण, कोल्लाती येसुदासु, पालेपु सांता राव, कोल्लाती श्रीनुबाबू, कर्री रामबाबू, संगानी टाटाराव और काटादी सतीश कुमार के रूप में हुई है।




