नई दिल्ली : मोदी कैबिनेट में संभावित विस्तार और फेरबदल की चर्चाओं के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने सार्वजनिक जीवन में 30 साल से अधिक का सफर पूरा करने का जिक्र करते हुए नई पीढ़ी को जिम्मेदारी देने की बात कही। गडकरी के इस बयान के बाद उनके मोदी कैबिनेट से बाहर होने या राजनीति से दूरी बनाने की चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि, गडकरी ने खुद न तो राजनीति से संन्यास लेने की बात कही है और न ही मोदी कैबिनेट छोड़ने की कोई घोषणा की है।
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गडकरी ने क्या कहा?
गडकरी नागपुर जिले के काटोल में आयोजित एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण क्लास में शामिल हुए थे। इसी दौरान उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन और भविष्य की जिम्मेदारियों को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उन्होंने 30 साल से अधिक का सफर तय कर लिया है। उनके मुताबिक, जिस गति से उन्होंने काम किया है, संभव है कि आने वाले दिनों में वे उसी गति से काम न कर पाएं। इसलिए वह चाहते हैं कि नई पीढ़ी जिम्मेदारी संभाले। उनके इसी बयान को मोदी कैबिनेट में संभावित बदलाव और विस्तार की चर्चाओं से जोड़कर देखा जाने लगा।
गडकरी के ऑफिस ने दी सफाई
बयान को लेकर बढ़ती चर्चाओं के बीच नितिन गडकरी के कार्यालय की ओर से सफाई दी गई। कार्यालय ने कहा कि गडकरी का बयान राजनीति से जुड़ा नहीं था। सफाई के मुताबिक, गडकरी लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट के संदर्भ में बात कर रहे थे। यह संगठन उनके द्वारा बनाया गया है और आदिवासी इलाकों में एकल विद्यालय चलाता है। कार्यालय ने कहा कि गडकरी का यह कहना कि वे अब पहले जितना काम नहीं कर सकते और युवा पीढ़ी को ज्यादा जिम्मेदारी मिलनी चाहिए, ट्रस्ट के कामकाज और भविष्य के नेतृत्व के संदर्भ में था। कार्यालय के अनुसार, कुछ टेलीविजन चैनलों ने इस बयान को उसके मूल संदर्भ से अलग करके राजनीतिक टिप्पणी के तौर पर पेश किया। कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने अपने पुराने दिनों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पहले पार्टी का काम करते समय वह समोसे खाते थे और कहीं पर भी सो जाते थे। हालांकि, कोरोना के बाद वह काफी अनुशासित हो गए। उन्होंने कहा कि अच्छी सेहत होना बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, अगर स्वास्थ्य अच्छा नहीं है तो सत्ता या पद का कोई मूल्य नहीं रह जाता।
जनवरी में भी दिया था ऐसा बयान
यह पहली बार नहीं है जब नितिन गडकरी ने नई पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपने की बात कही हो। इसी साल जनवरी में नागपुर में एडवांटेज विदर्भ-खासदार औद्योगिक महोत्सव के दौरान भी उन्होंने लगभग इसी तरह की बात कही थी। उस समय गडकरी ने कहा था कि एडवांटेज विदर्भ पहल में युवा पीढ़ी को शामिल किया गया है और धीरे-धीरे पीढ़ी में बदलाव होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि जब गाड़ी सुचारू रूप से चलने लगे तो पुरानी पीढ़ी को हटकर कोई दूसरा काम करना चाहिए और नई पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए। फिलहाल मोदी कैबिनेट के विस्तार या फेरबदल को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी सामने नहीं आई है। गडकरी के बयान के बाद चल रही चर्चाएं भी फिलहाल अटकलों पर आधारित हैं।




