घर टूटते देख हाथ जोड़कर रोते रहे पीड़ित, स्वर्णरेखा किनारे चला बुलडोजर

मानगो के कुंवर बस्ती में स्वर्णरेखा नदी किनारे अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासन की टीम ने तीन मकान ध्वस्त कर दिए। कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है।

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जमशेदपुर: मानगो के कुंवर बस्ती इलाके में शुक्रवार को स्वर्णरेखा नदी किनारे अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासन की टीम ने तीन मकानों को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान अपने घरों को टूटता देख प्रभावित परिवारों के सदस्य भावुक हो गए। वे हाथ जोड़कर अधिकारियों से मकान बचाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रशासन की कार्रवाई नहीं रुकी और देखते ही देखते तीनों मकान मलबे में तब्दील हो गए। अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पुलिस की मौजूदगी में जेसीबी मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू की गई। कार्रवाई शुरू होते ही प्रभावित परिवारों के बीच अफरातफरी मच गई। पीड़ित लोग अधिकारियों से कार्रवाई रोकने की लगातार अपील करते रहे।

भारी पुलिस बल के बीच हुई कार्रवाई

कार्रवाई के दौरान स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे। पीड़ित परिवारों और स्थानीय लोगों को टूटते मकानों के पास जाने से रोक दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लोगों को पीछे रखने के लिए पुलिस ने लाठी के बल का भी इस्तेमाल किया। इससे मौके पर तनाव और बढ़ गया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रभावित परिवार अपने मकानों को अपनी आंखों के सामने टूटता देखते रहे।

नोटिस के बाद कार्रवाई का दावा

अंचलाधिकारी बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि संबंधित मकान मालिकों को पहले ही नोटिस जारी किया गया था। निर्धारित अवधि में अतिक्रमण नहीं हटाए जाने के बाद प्रशासन की ओर से यह कार्रवाई की गई। प्रशासन का कहना है कि स्वर्णरेखा नदी के किनारे अवैध निर्माण नदी क्षेत्र के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकते हैं। ऐसे में नदी की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराना जरूरी है।

स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

मकान टूटने के बाद प्रभावित परिवारों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी देखने को मिली। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में समानता नहीं बरती जा रही है। उनका कहना है कि वे नदी किनारे अवैध निर्माण हटाए जाने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन कार्रवाई सभी के खिलाफ समान रूप से होनी चाहिए। स्थानीय निवासियों का दावा है कि स्वर्णरेखा नदी के किनारे कई बड़े भवन और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी लंबे समय से बने हुए हैं। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि प्रशासन का उद्देश्य नदी क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराना है, तो बड़े और प्रभावशाली लोगों के कथित अवैध निर्माणों पर भी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।

पुनर्वास की भी उठी मांग

स्थानीय लोगों ने पूरे मानगो क्षेत्र में स्वर्णरेखा नदी के किनारे बने सभी निर्माणों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही कार्रवाई की जद में आए परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास या पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग भी उठाई गई है। तीन मकानों के ध्वस्त होने के बाद इलाके में अतिक्रमण हटाओ अभियान और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

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