रांची : रांची स्थित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (HEC) के पुनरुद्धार (Revival) के प्रयासों में तेजी आई है। कंपनी को आर्थिक संकट से बाहर निकालने और उत्पादन को दोबारा गति देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की छह सदस्यीय संसदीय समिति की टीम गुरुवार को रांची पहुंची।
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तीनों प्लांट का लिया गया जायजा
केंद्रीय टीम ने गुरुवार को HEC के तीनों प्लांट का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने कंपनी की वर्तमान उत्पादन क्षमता, पुरानी मशीनरी की स्थिति और कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष अनुभव लिया। इस निरीक्षण को HEC के रिवाइवल के लिए एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। टीम की रिपोर्ट और इसके बाद सरकार के साथ होने वाली बैठक के आधार पर ही कंपनी के भविष्य की दिशा तय होगी।
500 करोड़ की बैंक गारंटी की मांग प्रमुख
श्रमिक संगठनों और भारतीय मजदूर संघ से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि HEC की सबसे बड़ी समस्या कार्यशील पूंजी (Working Capital) की कमी है। श्रमिक नेता रमाशंकर प्रसाद के अनुसार, वर्ष 2017 से कंपनी को बैंक गारंटी की सुविधा नहीं मिल रही है, जिसके कारण कच्चा माल खरीदने और बड़े ऑर्डर पूरे करने में बाधा आ रही है। श्रमिक संगठनों ने केंद्र सरकार से 500 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी उपलब्ध कराने की पुरजोर मांग की है, ताकि उत्पादन चक्र को फिर से शुरू किया जा सके।
जमीन और उत्पादन पर रहेगा फोकस
निरीक्षण के बाद आयोजित होने वाली उच्चस्तरीय बैठक में केवल पुराने कर्ज और देनदारियों पर ही नहीं, बल्कि कंपनी की 500 एकड़ जमीन के बेहतर इस्तेमाल और उत्पादन बढ़ाने की संभावनाओं पर भी गंभीर चर्चा होने की संभावना है। श्रमिक संगठनों का स्पष्ट मानना है कि केवल पुरानी देनदारियों का निपटारा ही काफी नहीं है, बल्कि कंपनी को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उत्पादन शुरू करना अनिवार्य है। अब HEC के हजारों कर्मचारियों और स्थानीय श्रमिक संगठनों की निगाहें केंद्र सरकार की इस टीम की रिपोर्ट और भविष्य में होने वाली ठोस पहल पर टिकी हुई हैं।








