‘बूट पॉलिश’ से मिली पहचान, फिर श्रीदेवी की आवाज बनीं कुमारी नाज

बाल कलाकार के रूप में लोकप्रिय हुईं कुमारी नाज ने हिंदी और भोजपुरी फिल्मों में काम किया और बाद में श्रीदेवी की शुरुआती फिल्मों के लिए डबिंग की।

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मुंबई: हिंदी सिनेमा में कई कलाकार ऐसे रहे हैं, जिन्होंने अपने अभिनय के साथ-साथ दूसरे हुनर से भी पहचान बनाई। कुमारी नाज भी उन्हीं कलाकारों में शामिल थीं। बचपन में ‘बेबी नाज’ के नाम से मशहूर हुईं कुमारी नाज ने अपनी मासूम अदाकारी से दर्शकों का दिल जीता। आगे चलकर उन्होंने हिंदी और भोजपुरी फिल्मों में अभिनय किया और जब पर्दे पर काम के मौके कम होने लगे तो डबिंग आर्टिस्ट के तौर पर अपनी आवाज को करियर का हिस्सा बना लिया। इसी दौरान वह श्रीदेवी की शुरुआती हिंदी फिल्मों की आवाज बनीं। कुमारी नाज का असली नाम सलमा बेग था। उनका जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता मिर्जा दाऊद बेग लेखक थे, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। यही वजह रही कि नाज को बेहद कम उम्र में काम शुरू करना पड़ा। करीब चार साल की उम्र से उन्होंने फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। बचपन का वह दौर, जब बच्चे पढ़ाई और खेलकूद में समय बिताते हैं, नाज ने कैमरे और शूटिंग के बीच गुजारा।

‘बूट पॉलिश’ ने बदल दी किस्मत

बाल कलाकार के तौर पर कुमारी नाज ने कई फिल्मों में काम किया, लेकिन 1954 में आई फिल्म ‘बूट पॉलिश’ उनके करियर का अहम पड़ाव साबित हुई। फिल्म में उन्होंने बेलू नाम की बच्ची का किरदार निभाया था। उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों से काफी सराहना मिली। ‘बूट पॉलिश’ को 1955 के कान फिल्म फेस्टिवल में प्रतियोगिता के लिए चुना गया था। फिल्म में उनके अभिनय को विशेष सम्मान भी मिला। इसके बाद बेबी नाज उस दौर की चर्चित बाल कलाकारों में शामिल हो गईं। उन्होंने ‘देवदास’, ‘मुसाफिर’, ‘लाजवंती’, ‘दो फूल’ और ‘कागज के फूल’ जैसी फिल्मों में भी काम किया। उम्र बढ़ने के साथ उन्होंने बाल कलाकार की छवि से आगे निकलकर बड़े किरदार निभाने शुरू किए।

हिंदी के साथ भोजपुरी सिनेमा में भी बनाई जगह

बड़ी होने के बाद कुमारी नाज को हिंदी फिल्मों में कई सहायक भूमिकाएं मिलीं। 1970 में रिलीज हुई ‘सच्चा झूठा’ में उन्होंने राजेश खन्ना की बहन का किरदार निभाया था। इसके अलावा वह ‘बहू बेगम’, ‘कटी पतंग’ और ‘हाथी मेरे साथी’ जैसी फिल्मों में भी नजर आईं। हालांकि, उनके सामने एक बड़ी चुनौती यह थी कि दर्शकों के बीच बनी ‘बेबी नाज’ की छवि से बाहर निकलना आसान नहीं था। इसी बीच उन्होंने भोजपुरी सिनेमा का रुख किया। 1963 में आई फिल्म ‘बिदेसिया’ से उन्हें भोजपुरी फिल्मों में पहचान मिली। इसके बाद ‘सैंया से नेहा लगाइबे’ और ‘अईल बसंत बहार’ जैसी फिल्मों में उन्होंने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। इस दौर में वह भोजपुरी सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिनी जाने लगीं।

अभिनय के बाद बनीं श्रीदेवी की आवाज

कुमारी नाज के करियर का सबसे अलग दौर तब आया, जब फिल्मों में अभिनय के अवसर धीरे-धीरे कम होने लगे। उन्होंने डबिंग आर्टिस्ट के तौर पर काम शुरू किया। इसी दौरान उनकी आवाज श्रीदेवी के शुरुआती हिंदी फिल्म करियर से जुड़ी। जब श्रीदेवी हिंदी फिल्मों में अपनी पहचान मजबूत कर रही थीं, उस समय कुमारी नाज ने उनकी शुरुआती हिंदी फिल्मों के लिए आवाज दी। कई रिपोर्ट्स में ‘हिम्मतवाला’, ‘मवाली’ और ‘तोहफा’ का विशेष रूप से उल्लेख मिलता है। पर्दे पर श्रीदेवी दिखाई देती थीं, लेकिन उनकी आवाज के पीछे कुमारी नाज की मेहनत भी शामिल थी। निजी जिंदगी में कुमारी नाज ने अभिनेता सुबीराज से शादी की थी। दोनों ने साथ काम भी किया था और फिल्म ‘देखा प्यार तुम्हारा’ के दौरान उनके रिश्ते की शुरुआत हुई। बाद में दोनों ने शादी कर ली। उनके दो बच्चे हुए। सुबीराज कपूर परिवार से जुड़े हुए थे।

कुमारी नाज का निधन 19 अक्टूबर 1995 को 51 वर्ष की उम्र में हुआ। उनकी मौत की वजह गंभीर लिवर की बीमारी बताई जाती है। बाल कलाकार के रूप में मिली पहचान से लेकर हिंदी और भोजपुरी सिनेमा में अभिनय तथा बाद में डबिंग तक, उनका सफर हिंदी फिल्म इतिहास की एक अलग कहानी है।

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