रांची : जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), रांची की ओर से युवाओं को POCSO एक्ट और किशोर न्याय से जुड़े कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करने के लिए जिला स्तरीय बहु-हितधारक परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम ‘सशक्त युवा, मजबूत भारत’ अभियान के तहत आयोजित हुआ। माननीय न्यायमूर्ति-सह-कार्यपालक अध्यक्ष, झालसा सुजीत नारायण प्रसाद के दिशा-निर्देश पर और झालसा की सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना तथा रांची के न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। डीएलएसए सचिव राकेश रौशन के नेतृत्व में कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि और अन्य गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर की। कार्यक्रम का संचालन डीएलएसए सचिव राकेश रौशन ने किया। स्वागत भाषण रांची के न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 ने दिया।
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POCSO मामलों में संवेदनशीलता पर जोर
न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 ने कहा कि POCSO एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड से संबंधित मामलों को संभालना संवेदनशील विषय है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य सभी स्टेकहोल्डर्स की जिम्मेदारियों और मामलों में उनके काम करने के तरीके की जानकारी देना है। पहले सत्र में एजेसी-4 बीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तवा ने POCSO एक्ट और POCSO फ्रेमवर्क पर जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के प्रति संवेदनशील नजरिए, रिपोर्टिंग एवं जांच, पुलिस और अभियोजन की भूमिका, पहचान एवं सम्मान की सुरक्षा, कानूनी सहायता और जांच अधिकारियों, प्रॉसिक्यूटर तथा कानूनी सहायता अधिकारियों के बीच समन्वय जैसे विषयों पर प्रकाश डाला। उन्होंने किशोरों और युवाओं के लिए बचाव संबंधी जागरूकता पर भी जानकारी दी।
पुलिस और अभियोजन की भूमिका पर चर्चा
दूसरे सत्र में पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) मुख्यालय-1 अमर कुमार पांडे ने POCSO एक्ट के तहत मामलों की जांच और जांच के दौरान आने वाली चुनौतियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मेडिकल ऑफिसर, स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर, प्रोबेशन ऑफिसर और सपोर्ट पर्सन की भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। तीसरे सत्र में POCSO एक्ट की पब्लिक प्रॉसिक्यूटर पल्लवी सिंह ने POCSO मामलों में अभियोजन पक्ष की भूमिका और युवाओं के लिए बचावकारी कानूनी साक्षरता पर संबोधन दिया। उन्होंने जांच से ट्रायल तक अभियोजन की भूमिका, पीड़ित और गवाह के प्रति संवेदनशील अभियोजन, पुलिस एवं कानूनी सहायता वकील के साथ समन्वय, कानूनी अधिकारों की जानकारी, रेफरल सिस्टम, युवाओं से जुड़े मुद्दों, समय पर हस्तक्षेप और न्याय तक पहुंच जैसे विषयों पर जानकारी दी।
बच्चों के इलाज और मेडिकल जांच पर जानकारी
चौथे सत्र में RIMS रांची के इमरजेंसी एवं ट्रॉमा सेंटर के एचओडी डॉ. प्रदीप कुमार भट्टाचार्या ने POCSO एक्ट के तहत यौन अपराधों के शिकार बच्चों के इलाज और मेडिकल जांच में मेडिकल अधिकारियों तथा अस्पतालों की भूमिका पर जानकारी दी। पांचवें सत्र में सहायक एलएडीसीएस सौरभ पांडे ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुओ मोटो रिट याचिका (आपराधिक) संख्या 1/2025 में विविध आवेदन संख्या 1998/2026 में 14 जुलाई 2026 को पारित आदेश-निर्णय और जेंडर संबंधी रिपोर्ट पर चर्चा की। इसमें निर्णय लिखने में संवेदनशीलता और सहानुभूति पर भी जोर दिया गया।
किशोर न्याय अधिनियम और पुनर्वास पर चर्चा
अंतिम सत्र में पी.एम., जे.जे. बोर्ड, रांची अमित गुप्ता ने किशोर न्याय अधिनियम के तहत कानून से टकराव की स्थिति में बच्चों से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने पहली बार अपराध करने वाले बच्चों, जमानत एवं कानूनी प्रतिनिधित्व, पुनर्वास, पारिवारिक परामर्श, जेजेबी और बच्चों के प्रति संवेदनशील स्टेकहोल्डर्स की भूमिका, युवाओं की कानूनी जरूरतों के आकलन और कैंपस जस्टिस पहल के बारे में विस्तार से बताया। कार्यक्रम के अंत में मध्यस्थ जहांआरा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
इस अवसर पर न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1, एजेसी-4 बीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तवा, डीएसपी मुख्यालय-1 अमर कुमार पांडे, पब्लिक प्रॉसिक्यूटर पल्लवी सिंह, डॉ. प्रदीप कुमार भट्टाचार्या, डीएलएसए सचिव राकेश रौशन, पी.एम., जे.जे. बोर्ड अमित गुप्ता, पीएलए चेयरमैन एवं सदस्यगण, सहायक एलएडीसीएस, डीसीपीयू सदस्य, पुलिस प्रशासन के पदाधिकारी, एलएडीसीएस सदस्य, मध्यस्थ, अधिवक्ता, कर्मचारी और पीएलवी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।








