रांची : धुर्वा स्थित झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के कार्यालय में आयोग की एक महत्वपूर्ण आंतरिक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष जनाब हिदायतुल्लाह खान ने की, जबकि उपाध्यक्ष प्राणेश सॉलोमन, ज्योति सिंह माथारू और शमशेर आलम विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक की शुरुआत पूर्व में आयोजित समीक्षा बैठकों में लिए गए निर्णयों और उन पर हुई प्रगति की समीक्षा के साथ हुई। इसके बाद राज्य में अल्पसंख्यक समुदाय के शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक उत्थान से जुड़े कई प्रमुख प्रस्तावों और योजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
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बैठक के दौरान राज्य में मॉब लिंचिंग की घटनाओं की रोकथाम के लिए कठोर कानून बनाने, अल्पसंख्यक निदेशालय का गठन करने, मदरसा बोर्ड और उर्दू अकादमी के गठन जैसी महत्वपूर्ण मांगों पर प्राथमिकता से चर्चा हुई। इसके अलावा, बिहार के मौलाना मजहरुल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय की तर्ज पर झारखंड में भी अरबी-फारसी विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया। अल्पसंख्यक विद्यालयों की स्थिति में सुधार के लिए शिक्षकों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने, आलिम-फाजिल की डिग्री को मान्यता देने, विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकें, ड्रेस और साइकिल वितरण योजना का लाभ समय पर पहुंचाने पर जोर दिया गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि लंबित विषयों के त्वरित समाधान के लिए संबंधित सरकारी विभागों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर ठोस कदम उठाए जाएंगे।
बैठक में आयोग के सदस्य जनाब एकरारुल हसन, वारिस कुरैशी, मुस्लेउद्दीन तौसीफ, रंजीत कुमार मल्लिक, श्रीमती सविता टुडू और सचिव मुमताज अली भी मौजूद थे। बैठक में वक्ताओं ने दोहराया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के सर्वांगीण विकास और अधिकारों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।




