रांची/नई दिल्ली : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 2025 प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली और अनियमितता का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। याचिकाकर्ता हरिशरण देवगन ने अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में 2025 की JPSC प्रारंभिक परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द करने और पूरी प्रक्रिया की समयबद्ध CBI जांच कराने की मांग की गई है।
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सेवानिवृत्त जज की देखरेख में स्वतंत्र कमेटी और ऑडिट की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कई अहम बिंदु उठाए गए हैं:
परीक्षा रद्द व पुनरायोजन : JPSC PT-2025 परीक्षा को रद्द कर कड़े सुरक्षा उपायों के साथ दोबारा आयोजित कराया जाए।
स्वतंत्र जांच कमेटी : सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज या झारखंड से बाहर के किसी हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच कमेटी गठित हो।
डिजिटल व फिजिकल रिकॉर्ड की सुरक्षा : मूल OMR शीट, कार्बन कॉपी, प्रश्नपत्र, उत्तर कुंजी, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, परीक्षा केंद्रों के CCTV फुटेज और डिस्पैच रजिस्टर को तुरंत सुरक्षित (Preserve) किया जाए।
स्वतंत्र ऑडिट : OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने की संपूर्ण प्रक्रिया का निष्पक्ष ऑडिट कराया जाए।
वायरल OMR कॉपी के बाद भड़का था छात्र आंदोलन
मामले की शुरुआत 2 जुलाई को तब हुई जब एक सफल अभ्यर्थी की OMR कार्बन कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल हुई। आरोप है कि पेपर-1 में केवल 48 प्रश्न सही हल करने के बावजूद उस अभ्यर्थी को मुख्य परीक्षा के लिए योग्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद अभ्यर्थियों का आक्रोश फूट पड़ा। यद्यपि राज्य सरकार ने मामले की जांच CID को सौंपी है, लेकिन छात्र इससे असंतुष्ट हैं और 25 जुलाई से रांची में अनवरत आंदोलन कर रहे हैं।




