लखनऊ : उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में जॉइंट मैजिस्ट्रेट के पद पर तैनात आईएएस अधिकारी रिंकू राही एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) को पत्र लिखकर खुद को आधा वेतन दिए जाने और कैडर किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित करने की मांग की है। रिंकू राही का कहना है कि मौजूदा तैनाती में उन्हें प्रतिदिन बमुश्किल चार घंटे का ही काम मिल पाता है, इसलिए ‘जितना काम, उतना वेतन’ के सिद्धांत के तहत उन्हें आधा वेतन दिया जाए।
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उन्होंने पत्र में लिखा है कि यदि उन्हें नियमित प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए उपयुक्त माना जाता है तो ऐसी जगह तैनाती दी जाए, जहां वे बिना प्रशासनिक या राजनीतिक हस्तक्षेप के सुशासन से जुड़े कार्य कर सकें। अन्यथा उनका कैडर किसी दूसरे राज्य में स्थानांतरित किया जाए।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
रिंकू राही ने बताया कि इससे पहले राजस्व परिषद में करीब एक वर्ष तक तैनाती के दौरान भी उन्हें पर्याप्त कार्य नहीं मिला था, जिसके बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) की मांग करते हुए राष्ट्रपति को पत्र लिखा था। बाद में उनका तबादला जालौन में जॉइंट मैजिस्ट्रेट के पद पर किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यहां भी प्रशासनिक व्यवस्था के कारण प्रभावी ढंग से काम करने का अवसर नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि बार-बार ऐसी परिस्थितियां बनने से ईमानदार अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होता है और भविष्य में उनकी प्रशासनिक क्षमता के मूल्यांकन पर भी असर पड़ सकता है।
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मंत्री और डीएम पर लगाए आरोप
अपने पत्र में रिंकू राही ने कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के नाम का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि अवैध कब्जों से जुड़े मामलों की जांच प्रभावित करने का प्रयास किया गया। उन्होंने दावा किया कि संबंधित मामले की जांच के लिए समिति गठित हुई थी, लेकिन रिपोर्ट आने से पहले ही उनका तबादला एसडीएम (न्यायिक) पद पर कर दिया गया। उन्होंने जालौन के जिलाधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कुछ मामलों में कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए गए। साथ ही उन्होंने कहा कि जनता दर्शन में शिकायतों का निस्तारण केवल औपचारिकता की तरह होता है, इसलिए वे अपना समय न्यायिक कार्यों में लगाना अधिक उचित समझते हैं।




