रांची : देश के प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थानों में शामिल प्रभात प्रकाशन का 68वां स्थापना दिवस शनिवार को राजधानी रांची में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, लेखकों और पुस्तक प्रेमियों की उपस्थिति में मनाया गया। कार्यक्रम में संस्था की साहित्यिक यात्रा और भारतीय बौद्धिक परंपरा में उसके योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई।
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इस अवसर पर चिंतक और लेखक डॉ. मयंक मुरारी ने कहा कि झारखंड में आम लोगों को लेखन से जोड़ने में प्रभात प्रकाशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि संस्था ने यह साबित किया है कि पुस्तकें केवल ज्ञान का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज की स्मृति, संस्कृति और सभ्यता की संवाहक भी होती हैं।
पुस्तकों की प्रासंगिकता पर दिया जोर
डॉ. मयंक मुरारी ने कहा कि तकनीक के तेजी से बदलते दौर में भी पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है। उनके अनुसार गहन अध्ययन, चिंतन और व्यक्तित्व निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम आज भी पुस्तकें ही हैं। उन्होंने युवाओं से नियमित पठन-पाठन की आदत विकसित करने और भारतीय ज्ञान परंपरा, इतिहास तथा संस्कृति से जुड़ने का आह्वान किया।
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उन्होंने प्रभात प्रकाशन की 68 वर्षों की साहित्यिक यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान ने भारतीय चिंतन, इतिहास, राष्ट्रवाद, साहित्य, प्रेरक जीवनियों और समकालीन विषयों पर उत्कृष्ट पुस्तकों का प्रकाशन कर देश के बौद्धिक विमर्श को समृद्ध किया है।
साहित्यकारों ने की संस्थान की सराहना
डॉ. मयंक मुरारी ने कहा कि अच्छे प्रकाशन केवल पुस्तकें प्रकाशित नहीं करते, बल्कि विचारों का निर्माण करते हैं और समाज को नई दिशा देने का कार्य भी करते हैं। कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इनमें संजय जी, राजेश शर्मा, दिवाकर जी, संजीव जी, राजेंद्र सिंह, मनोज नेगी, विवेकानंद जी, अमन कुमार और अंकू कुमार सहित कई साहित्यप्रेमी एवं बुद्धिजीवी शामिल हुए। सभी अतिथियों ने प्रभात प्रकाशन की दीर्घ साहित्यिक यात्रा की सराहना करते हुए इसे भारतीय प्रकाशन जगत की एक महत्वपूर्ण संस्था बताया।
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