गढ़वा : गढ़वा जिले के बड़गड़ प्रखंड में पेंशनधारी रतन लकड़ा की मौत के मामले में जिला प्रशासन की जांच में बैंक कर्मियों की लापरवाही सामने आई है। प्रशासन ने बैंक कर्मचारियों को दोषी मानते हुए कार्रवाई के लिए रिपोर्ट संबंधित रीजनल मैनेजर को भेज दी है। इसकी पुष्टि डीसी पशुपति नाथ मिश्रा ने की है।
आदरणीय सर,
— DC GARHWA (@dc_garhwa) July 7, 2026
मामला संज्ञान में आते ही त्वरित कार्रवाई करते हुए एसडीएम रंका एवं एलडीएम को शीघ्र विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांचोपरांत दोषी पाए जाने वाले सभी के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जायेगी। नियमानुसार रतन लकड़ा के परिजनों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
मालूम हो कि 75 वर्षीय रतन लकड़ा महुआटीकर गांव के निवासी थे। वह इलाज के लिए अपने खाते से पेंशन की राशि निकालने बैंक पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि खाते में पैसे होने के बावजूद बैंक कर्मियों ने उन्हें बार-बार दौड़ाया, जिससे समय पर इलाज नहीं हो सका और उनकी मौत हो गई। मामले पर सीएम हेमंत सोरेन ने भी संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए थे।
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जांच में परिजनों के आरोपों की पड़ताल
सीएम के निर्देश के बाद गढ़वा डीसी ने एसडीएम रंका और एलडीएम को विस्तृत जांच का जिम्मा सौंपा। अधिकारियों ने मृतक के परिजनों, ग्रामीणों, बैंक कर्मियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से पूछताछ की। इस दौरान मृतक की पत्नी रेपा लकड़ा, पुत्र अनिल लकड़ा और पुत्रवधू फुलमनी लकड़ा का बयान भी दर्ज किया गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि रतन लकड़ा लंबे समय से बीमार थे और वृद्धा पेंशन ही उनके इलाज का मुख्य सहारा थी। कई बार बैंक जाने के बावजूद केवाईसी अपडेट नहीं होने का हवाला देकर भुगतान रोक दिया गया। उन्होंने बैंक कर्मियों पर रिश्वत मांगने का भी आरोप लगाया।
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बैंक कर्मियों के व्यवहार पर भी उठे सवाल
परिजनों के अनुसार, बीमारी के कारण रतन लकड़ा बैंक की दूसरी मंजिल तक नहीं जा सकते थे। इसके बावजूद नीचे आकर बायोमेट्रिक सत्यापन करने की उनकी अपील नहीं मानी गई। पुत्रवधू फुलमनी लकड़ा ने आरोप लगाया कि शाखा प्रबंधक से मानवीय आधार पर मदद मांगने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। बाद में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप पर बैंक कर्मी घर पहुंचे और बिस्तर पर ही अंगूठे का निशान लेकर केवाईसी की प्रक्रिया पूरी की। हालांकि, इसके बाद भी पेंशन की राशि नहीं निकाली जा सकी। परिजनों का कहना है कि समय पर पैसे मिल जाते तो इलाज बेहतर तरीके से हो सकता था और संभवतः रतन लकड़ा की जान बचाई जा सकती थी।
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रात में घर पहुंचने का भी लगा आरोप
मामले के तूल पकड़ने के बाद ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रात के समय बैंक प्रबंधक और एक कर्मचारी पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और मामले को मैनेज करने का प्रयास किया। ग्रामीणों का दावा है कि विरोध होने पर दोनों वहां से चले गए। इस पूरे मामले में जिला प्रशासन ने जांच रिपोर्ट कार्रवाई के लिए संबंधित रीजनल मैनेजर को भेज दी है।




