झारखंड में ओपन जेल की तैयारी पूरी, महिला कैदियों के लिए भी बनेगी अलग व्यवस्था

रांची: झारखंड में कैदियों के सुधार और पुनर्वास की दिशा में नई पहल की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने ओपन जेल व्यवस्था को आगे बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार

झारखंड में ओपन जेल
सांकेतिक फोटो झारखंड में ओपन जेल

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रांची:  झारखंड में कैदियों के सुधार और पुनर्वास की दिशा में नई पहल की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने ओपन जेल व्यवस्था को आगे बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने जानकारी दी कि रांची, हजारीबाग, दुमका और जमशेदपुर के सेंट्रल जेल परिसरों में ओपन बैरक तैयार कर ली गई हैं। इनके संचालन के लिए गृह विभाग की ओर से अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य पात्र कैदियों को नियंत्रित और सुरक्षित माहौल में अधिक स्वतंत्रता देना है, ताकि वे धीरे-धीरे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें और सामान्य जीवन में लौटने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

ओपन बैरक के संचालन के लिए बनेगी SOP

हाईकोर्ट में सरकार ने बताया कि ओपन बैरक के बेहतर संचालन और कैदियों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए विशेष मानक संचालन प्रक्रिया यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार की जा रही है। इस काम में झारखंड लीगल सर्विस अथॉरिटी का सहयोग लिया जा रहा है।

SOP के जरिए ओपन बैरक में रहने वाले कैदियों की पात्रता, सुविधाओं और निगरानी से जुड़े प्रावधानों को व्यवस्थित करने की तैयारी है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पुनर्वास की प्रक्रिया प्रभावी और मानवीय तरीके से संचालित हो।

महिला कैदियों के लिए भी अलग ओपन जेल की योजना

इस व्यवस्था में महिला कैदियों की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की परिकल्पना के अनुरूप उनके लिए अलग ओपन जेल विकसित करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इससे महिला कैदियों के पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन के लिए विशेष व्यवस्था उपलब्ध कराने का रास्ता खुलेगा।

हजारीबाग में 32 एकड़ जमीन चिह्नित

ओपन जेल व्यवस्था के विस्तार के लिए हजारीबाग में 32 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। इसके अलावा गठित होने वाली विशेष कमेटियां ओपन जेल में कैदियों को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी करेंगी।

इनमें चिकित्सा सुविधा, जिम, पौष्टिक भोजन और बेहतर जीवन स्तर से जुड़े पहलुओं को शामिल किया जाएगा। व्यवस्था का उद्देश्य कैदियों को केवल बंदी बनाकर रखना नहीं, बल्कि उनके शारीरिक और मानसिक कल्याण के साथ समाज में दोबारा स्थापित होने का अवसर देना है।

21 जनवरी को होगी अगली सुनवाई

इस मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक की खंडपीठ में हुई। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 21 जनवरी की तारीख निर्धारित की है। अब ओपन बैरक के संचालन, SOP और महिला कैदियों के लिए प्रस्तावित व्यवस्था से जुड़े अगले कदमों पर नजर रहेगी।

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