राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा है कि संघ की वास्तविक पहचान उसके स्वयंसेवकों के आचरण से ही होती है। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक का आचरण और व्यवहार ऐसा होना चाहिए, जो समाज के लिए पूरी तरह से अनुकरणीय बने।
स्वयंसेवक ही संघ का असली प्रतिनिधि होता है
कार्यक्रम के दौरान डॉ. मोहन भागवत ने स्पष्ट रूप से कहा कि संघ न तो किसी कार्यालय से बनता है, न ही किसी शाखा या किसी समूह से। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक ही संघ का असली प्रतिनिधि होता है। स्वयंसेवक का व्यवहार और उसका आचरण ही समाज को संघ के बारे में सही संदेश और जानकारी देता है। सरसंघचालक ने कहा कि संघ में आने का भाव कभी भी कुछ पाने का नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज को देने का होना चाहिए।
स्वार्थ के लिए संघ में आने वाला व्यक्ति स्वयंसेवक के वास्तविक भाव को कभी नहीं समझ सकता
डॉ. भागवत ने कहा कि स्वार्थ के लिए संघ में आने वाला व्यक्ति स्वयंसेवक के वास्तविक भाव को कभी नहीं समझ सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि यहां कुछ हासिल करने की अपेक्षा से नहीं, बल्कि अपना योगदान देने की भावना से काम किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक स्वयंसेवक के लिए समर्पण और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव ही सबसे महत्वपूर्ण होता है।
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