तमिलनाडु की पारंपरिक युद्ध कला सिलंबम सीख रहे झारखंड के बच्चे

रांची: तमिलनाडु की प्राचीन पारंपरिक युद्ध कला सिलंबम झारखंड में भी अपनी पहचान बनाने की दिशा में रविवार को रांची में आयोजित झारखंड राज्य सिलंबम चैंपियनशिप में राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे खिलाड़ी अपनी प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन कर रहे हैं। झारखंड में

सिलंबम

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रांची: तमिलनाडु की प्राचीन पारंपरिक युद्ध कला सिलंबम झारखंड में भी अपनी पहचान बनाने की दिशा में रविवार को रांची में आयोजित झारखंड राज्य सिलंबम चैंपियनशिप में राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे खिलाड़ी अपनी प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन कर रहे हैं। झारखंड में सिलंबम की यह पहली राज्यस्तरीय चैंपियनशिप है।

प्रतियोगिता में नेशनल डेवलपर से लेकर जूनियर, यूथ और सीनियर वर्ग के प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इस आयोजन में करीब 200 खिलाड़ी शामिल हुए। अलग-अलग आयु वर्ग के खिलाड़ियों के बीच मुकाबले के जरिए इस पारंपरिक खेल को बढ़ावा देने और नई प्रतिभाओं को सामने लाने की कोशिश की जा रही है।
सिलंबम तमिलनाडु की प्राचीन हथियार आधारित युद्ध कला
सिलंबम तमिलनाडु की प्राचीन हथियार आधारित युद्ध कला है। इसमें मुख्य रूप से लाठी संचालन के साथ शारीरिक संतुलन, फूर्ति, गति, एकाग्रता और तकनीकी कौशल का महत्व होता है। इस कला में खिलाड़ी को प्रतिद्वंद्वी की गतिविधियों को समझने और तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता विकसित करनी होती है।

नियमित अभ्यास से शारीरिक दक्षता और अनुशासन को भी बढ़ावा मिलता है। झारखंड में इस खेल को लोकप्रिय बनाने के लिए राज्यस्तरीय प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है, ताकि बच्चों और युवाओं को इसके बारे में जानने और इसमें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सके।

चैंपियनशिप में जूनियर, यूथ और सीनियर वर्ग के खिलाड़ी अपनी-अपनी श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। युवा खिलाड़ियों के लिए यह अपनी तकनीक और क्षमता को परखने का अवसर है। जबकि सीनियर वर्ग के प्रतिभागी अनुभव के आधार पर मुकाबले में अपनी दक्षता दिखा रहे हैं। विभिन्न जिलों से खिलाड़ियों की भागीदारी यह संकेत देती है कि झारखंड में सिलंबम के प्रति रुचि बढ़ाने की संभावनाएं मौजूद हैं। इस तरह की प्रतियोगिताओं से खिलाड़ियों को अपनी कमियों को समझने और बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयारी करने का मौका मिलता है।

झारखंड में सिलंबम की यह पहली राज्यस्तरीय चैंपियनशिप है। किसी खेल को नए क्षेत्र में लोकप्रिय बनाने के लिए नियमित प्रतियोगिताओं और प्रशिक्षण की अहम भूमिका होती है। राज्य स्तर पर खिलाड़ियों को मुकाबले का मंच मिलने से उनकी प्रतिभा को पहचानने में मदद मिल सकती है।  साथ ही, अलग-अलग जिलों के खिलाड़ियों को एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करने और खेल की तकनीकों को समझने का अवसर मिलता है।

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