प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आकाशवाणी से ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देश-विदेश के लोगों से अपने विचार साझा किए। यह मासिक रेडियो कार्यक्रम की 139वीं कड़ी है। पीएम मोदी मे इस कार्यक्रम में कहा कि आज से 12 वर्ष पहले इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी ये यात्रा निरंतर जारी है। इस यात्रा के सहयात्री और मार्गदर्शक आप ही हैं।
त्योहारों की दी शुभकामनाएं
पीएम मोदी ने कहा, ”आने वाले दिनों में दिवाली, छठ महापर्व और कई दूसरे त्योहारों की रौनक रहेगी। आप स्वस्थ और सुरक्षित रहकर पूरे परिवार के साथ त्योहार मनाएं, और, दूसरों को भी अपनी खुशी में शामिल करें। मैं आप सभी को आने वाले त्योहारों की शुभकामनाएं देता हूं। मुझे हमेशा की तरह आपके संदेशों और सुझावों का इंतजार रहेगा। आपके सुझावों से ‘मन की बात’ को नए विषय मिलते हैं, नई दिशा मिलती है।”
नॉर्थ-ईस्ट में कैसे बढ़ी मोटे अनाज की खेती?
उन्होंने कहा, ”आप सभी को याद होगा कि भारत के आह्वान पर साल 2023 को ‘इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स’ के रूप में मनाया गया था। इसे पूरी दुनिया में बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी। इस पहल के जरिए लोगों ने जाना कि सुपर फूड श्रीअन्न, यानि मिलेट्स, हमारी अपनी संस्कृति से कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं। नॉर्थ-ईस्ट में भी मिलेट्स की खेती की एक समृद्ध परंपरा रही है। लेकिन समय के साथ लोग इससे दूर हो रहे थे। अब ये स्थिति बदल रही है। मेघालय के पश्चिम जयंतिया हिल्स जिले में खांडुली नाम का एक गांव है। यहां कई पीढ़ियों से मिलेट्स, स्थानीय खान-पान परंपरा का अहम हिस्सा रहे हैं। लेकिन कुछ समय से, यहां इनकी खेती करने वाले किसानों की संख्या कम हो रही थी, ऐसे में, यहां की दो सहेलियों ने एक नई पहल की। उन्होंने मिलेट्स से नए प्रोडक्ट्स बनाने पर ध्यान दिया। मिलेट्स का वैल्यू एडिशन करते हुए उन्होंने कुकीज, केक और मफिंस के साथ-साथ मिलेट्स से बने बेबी फूड भी तैयार किए | इससे मिलेट्स से बने प्रो़क्ट्स की बिक्री बढ़ी और मिलेट्स की मांग भी बढ़ने लगी | ऐसे में यहां के किसानों ने भी फिर से मिलेट्स की खेती करना शुरु कर दिया है।”
उन्होंने कहा, ”मेघालय के ही पश्चिम गारो हिल्स जिले के सादोलपाड़ा गांव में भी कुछ नए प्रयास हो रहे हैं। यहां के किसान चेकजिंग संगमा ने, मिलेट्स का महत्व समझते हुए आधुनिक तरीकों से इसकी खेती शुरु की है। इससे उनकी आय भी बढ़ी है और गांव में भी एक जागरुकता आई है। इसी तरह नगालैंड के कोहिमा का एक गांव है केजोमा। इस गांव में एक दशक से भी ज्यादा समय से मिलेट्स की खेती बंद थी। इसके चलते यहां एक पूरी पीढ़ी इस पारंपरिक फसल से अनजान रह गई। सोचिए, जिस फसल को उनके दादा-दादी उगाते थे, उसे गांव वाले ही भूलने लगे। साल 2024 में यहां के लोगों ने मिलेट्स की खेती फिर से शुरू की। 2025 में केजोमा ने अपना पहला मिलेट्स फेस्टिलव मनाया।”
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आईआईटी मद्रास में ब्रेन सेंटर की क्या खासियत?
पीएम मोदी ने कहा, ”इस महीने की शुरुआत में मैं चेन्नई गया था। मेरी मुलाकात वहां देश के कई वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और युवा प्रतिभाओं से हुई | हमारे युवा आज ऐसे विषयों पर भी काम कर रहे है जो पूरी मानवता का भविष्य बदल सकते हैं। ऐसा ही एक क्षेत्र है ब्रेन रिसर्च। इसी से जुड़े, ‘सुधा गोपाल कृष्णन ब्रेन सेंटर’ का मैंने आईआईटी मद्रास में लोकार्पण किया था। इस सेंटर ने एक ब्रेन इमेजिंग टेक्नॉलजी प्लेटफॉर्म बनाया है जो दुनिया-भर के लिए मिसाल है।”
उन्होंने आगे कहा, ”इसके जरिए मानव मस्तिष्क की हाई-रिजॉल्यूशन डिजिटल 3डी तस्वीरें तैयार की जा रही हैं। उनका लक्ष्य है आने वाले दिनों में 100 ह्यूमन ब्रेन की 3डी मैपिंग करके उनका बारीकी से अध्ययन करना।
पूरी दुनिया में ये इस तरह का पहला मिशन है । इस काम में परम शक्ति सुपर कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस ब्रेन सेंटर के निर्माण में देश की इंडस्ट्री ने सरकार के साथ मिलकर बड़ी भूमिका निभाई है। आईआईटी के कई पूर्व छात्र और शिक्षक भी इस रिसर्च सेंटर के लिए साथ आए है ।”
प्रधानमंत्री ने कहा, ”ये प्रोजेक्ट इतना अहम इसलिए है, क्योंकि विज्ञान की इतनी प्रगति के बावजूद भी मानव मस्तिष्क आज भी एक बड़ी वैज्ञानिक पहेली है। आज भी अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियां हैं, जिनका कोई ठोस इलाज नहीं है। इसलिए विज्ञान ह्यूमन ब्रेन की फंक्शनिंग को जितना गहराई से समझेगा, उतने ही नए स्कोप आने वाले समय में बनेंगे। ये भी तय हुआ है कि 100 ह्यूमन ब्रेन का ये डेटा आगे अलग-अलग क्षेत्र में शोध के लिए ओपन सोर्स के तौर पर उपलब्ध कराया जाएगा।”
प्रधानमंत्री ने कहा, ”हमारे देश के लोगों की एक बड़ी विशेषता है। हम नई तकनीक को बहुत जल्दी अपना लेते हैं। हम सहज रूप से तकनीक को अपनी दैनिक जिंदगी का हिस्सा भी बना लेते हैं। ‘ई-संजीवनी योजना’ इसका एक बहुत अच्छा उदाहरण है। इससे पता चलता है कि लोगों के जीवन को आसान बनाने में तकनीक का कैसे बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। मुझे ये देखकर बहुत संतोष होता है कि इसके जरिए अब तक करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन किए जा चुके हैं। यह आंकड़ा बहुत बड़ा है। तकनीक की ताकत, हमारे डॉक्टरों के सेवाभाव, और देशवासियों के विश्वास का यह बेहतरीन उदाहरण है।”
उन्होंने कहा, ”आज ई-संजीवनी सेवा अपने विशाल नेटवर्क के जरिए देश के दूरदराज के इलाकों में भी पहुंच चुकी है। इसका लाभ उठाने वाले लोगों की कहानियां आपको भावुक कर देंगी। अंडमान-निकोबार के बाराटांग द्वीप में जारवा जनजाति के ओहो-ताहाने को तेज बुखार था। सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। ऐसे में स्थानीय स्वास्थ्य कर्मी ने ई-संजीवनी के जरिए विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क किया। उस बच्चे को निमोनिया था और जैसे ही वो डॉक्टर की निगरानी में आया, उसकी स्थिति में तेजी से सुधार होने लगा।”
उन्होंने कहा, ”एक समय था डॉक्टर को दिखाने में छोटी-सी स्वास्थ्य जांच में भी लोगों को काफी समय लग जाता था, बहुत कठिनाइयां आती थी। आज देशभर में लगभग 1 लाख 90 हजार आयुष्मान आरोग्य मंदिर लोगों के जीवन में नई-नई सुविधाएं लेकर आए हैं। ये आरोग्य मंदिर एक प्रकार से, पंचायतों के वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित हो रहे हैं। सबसे सुखद बात यह है कि अब गांवों के लोग भी नियमित जांच करवा रहे हैं, ताकि वे स्वस्थ रहें। और इसमें ई-संजीवनी बहुत बड़ी भूमिका निभा रही है।”
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