महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की ओर से गठित जांच समिति ने अभ्यर्थियों के शैक्षणिक दस्तावेजों और विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड की जांच की। इसमें चार प्रमुख तरह की गड़बड़ियां सामने आईं। जांच के दौरान राज्य के एक निजी विश्वविद्यालय से स्नातक की परीक्षा पास करने वाली 33 अभ्यर्थियों के दैनिक उपस्थिति पत्रक, शुल्क रसीद और आंतरिक मूल्यांकन से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में विश्वविद्यालय को काफी परेशानी हुई।
इसके अलावा, अभ्यर्थियों की उपस्थिति शीट में उत्तर पुस्तिकाओं के सीरियल नंबर पर स्पष्ट रूप से ओवरराइटिंग यानी काट-छांट कर दोबारा लिखे जाने के निशान मिले। इससे दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल उठे। जांच समिति को डिग्री जारी करने की तारीखों में भी विसंगतियां मिलीं। अधिकतर अभ्यर्थियों की मुख्य डिग्री पर जारी होने की तारीख 15 मई 2025 दर्ज थी, जबकि विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह 9 मार्च 2025 को ही आयोजित हो चुका था।
इसके साथ ही कुछ मामलों में प्रोविजनल प्रमाण पत्र अंतिम डिग्री जारी होने के बाद दिए जाने का उल्लेख मिला। जांच में एक और अहम बात सामने आई। इन अभ्यर्थियों के 12वीं की परीक्षा पास करने और स्नातक में नामांकन लेने के बीच छह से 13 साल तक का अंतर पाया गया। इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए जांच समिति ने अभ्यर्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड पर सवाल उठाए।
2023 में शुरू हुई थी भर्ती प्रक्रिया
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने झारखंड महिला पर्यवेक्षिका प्रतियोगिता परीक्षा-2023 आयोजित की थी। इसके लिए वर्ष 2023 में ही अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे गए थे। इसके बाद सितंबर 2024 में लिखित परीक्षा आयोजित की गई और 27 मई 2025 को परीक्षा का अंतिम परिणाम घोषित किया गया।
महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने महिला पर्यवेक्षिका के 444 पदों पर नियुक्ति के लिए आयोग को अधियाचना भेजी थी। हालांकि, प्रतियोगिता परीक्षा में कुल 313 अभ्यर्थी ही सफल हुए और 131 पद खाली रह गए। परिणाम जारी होने के बाद कर्मचारी चयन आयोग ने सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा विभाग को भेजी थी।33 अभ्यर्थियों की अनुशंसा वापस, 28 का मामला अदालत में लंबित
डिग्रियों और शैक्षणिक दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आने के बाद विभाग ने 33 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा आयोग को वापस लौटा दी है। विभाग ने आयोग से पूरे मामले में नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करने को कहा है।
वहीं, भर्ती प्रक्रिया में सफल 28 अन्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा फिलहाल न्यायालय में लंबित है। ऐसे में महिला पर्यवेक्षिका भर्ती में दस्तावेजों के सत्यापन और अदालत में लंबित मामलों की स्थिति अहम हो गई है।
निजी विश्वविद्यालय पर कार्रवाई की सिफारिश
महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने 33 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा वापस भेजने के साथ ही मामले में आगे की कार्रवाई का आग्रह किया है। दूसरी ओर, उच्च शिक्षा विभाग ने संबंधित निजी विश्वविद्यालय के खिलाफ कार्रवाई के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को पत्र भेजा है। विभाग ने विश्वविद्यालय के मामले में उचित कदम उठाने की सिफारिश की है।