रांची: झारखंड पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने राज्य के पांच डिवीजन में चल रही करीब 1,680 करोड़ रुपये की 10 बहुग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं (एमवीएस) को अधूरा पाए जाने के बाद इन पर रोक लगा दी है। एडवोकेट जनरल की सिफारिशों पर विभाग ने यह फैसला किया है। ये सभी योजनाएं चेन्नई की कंपनी मेसर्स श्रीराम ईपीसी द्वारा पूरी कराई जा रही थीं। कंपनी के जिम्मे कुल 10 योजनाएं थीं, जो चाईबासा, चतरा, हजारीबाग, धनबाद और मधुपुर में चल रही थीं।
also read : सुप्रीम कोर्ट पर दबाव नहीं बना सकता कोई, राहुल गांधी के मार्च पर CJI सूर्यकांत की दोटूक
कई योजनाओं की निर्धारित समय-सीमा वर्षों पहले बीत चुकी है, लेकिन वे अब तक पूरी नहीं हो सकीं। अब विभाग ने शेष कार्य के लिए नए सिरे से निविदा निकालने का निर्णय लिया है। 10 योजनाओं में से पांच का निर्माण डीएमएफटी फंड से, चार का राज्य मद से और एक का जल जीवन मिशन के तहत होना है।
दिसंबर तक काम पूरा नहीं तो ब्लैकलिस्ट
विभाग ने श्रीराम कंपनी पर कार्रवाई करने के साथ ही अब उन सभी कंपनियों की सूची बनानी शुरू कर दी है, जो अपने कार्यों में लगातार देरी कर रही हैं। विभाग ने ऐसी कंपनियों को सख्त निर्देश दिया है कि वे दिसंबर 2026 तक हर हाल में अपना काम पूरा करें। निर्धारित समय में कार्य पूरा नहीं करने पर उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।
लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी: योगेंद्र
पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा है कि आमजन को पेयजल एवं स्वच्छता से जुड़ी सेवाएं समय पर उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा एवं जवाबदेही से निर्वहन करें। लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को नेपाल हाउस में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। इसमें सचिव अबु इमरान, जल जीवन मिशन के निदेशक शशि रंजन, अभियंता प्रमुख व अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
also read : झारखंड में कल से हटेगी बालू खनन पर रोक, फिर भी दाम ऊंचे
विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक डीएमएफटी मद से 2022 में पूरी होने वाली चाईबासा आइता एवं पुराना चाईबासा जलापूर्ति योजना की भौतिक प्रगति तीन साल में 30 से 95 प्रतिशत के बीच दर्ज है। योजना की स्वीकृत राशि 94.38 करोड़ में 88.09 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिसमें 36.40 करोड़ रुपये खर्च हुए। वहीं, तांतनगर फुल ब्लॉक कवरेज योजना में करीब 67 प्रतिशत काम हुआ, जबकि इसकी समय-सीमा भी अगस्त 2022 थी। एग्रीमेंट राशि 92.75 करोड़ में 87.69 करोड़ का आवंटन किया, जिसमें 59.77 करोड़ खर्च हुए।
also read : नेमरा में मां के श्राद्धकर्म के लिए CM हेमंत सोरेन ने की चूल्हे की पूजा




