नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और वोटरों के नाम काटे जाने के मामले में चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं ने इस पूरी प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी से जवाब मांगा है। अब इस मामले में चुनाव आयोग को अपना पक्ष रखना होगा।
Read More : रेलवे में 12वीं पास के लिए निकली बंपर नौकरियां, 13 नवंबर तक करें आवेदन
एक याचिकाकर्ता के आचरण पर कोर्ट ने जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 13 याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर भी कड़ी आपत्ति जताई। इन नेताओं ने चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तरीके को चुनौती दी है। याचिका पर नोटिस जारी करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा, “हम अगली सुनवाई की तारीख पर याचिकाकर्ताओं में से एक से उसके आचरण के बारे में पूछना चाहेंगे।”
‘हाथीदांत की मीनार में बैठकर काम नहीं कर रहे’
सुनवाई के दौरान राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से कथित SIR अनियमितताओं के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किए जाने का मुद्दा भी उठा। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा, “कोई भी न्यायपालिका को दबाव में नहीं डाल सकता।” वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत में राजनीतिक जुलूस और उससे जुड़े घटनाक्रम पर आपत्ति जताई। उन्होंने बताया कि करीब 200 वकीलों ने इस तरह से दबाव बनाने की कोशिश पर चिंता जताते हुए एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत ऐसी घटनाओं से अनजान नहीं है और वह ‘हाथीदांत की मीनार’ में बैठकर काम नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कमजोर प्रयासों पर कोई ध्यान नहीं देता। अदालत बाहर दिए जा रहे बयानों से भी अवगत है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने असदुद्दीन ओवैसी समेत विभिन्न नेताओं की ओर से निर्वाचन आयोग से संबंधित दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किए। साथ ही, समान राहत की मांग करने वाली याचिकाओं को एक साथ रखने का निर्देश दिया।
याचिका में कौन-कौन से विपक्षी नेता शामिल?
याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी NCP (SP) नेता सुप्रिया सुले और शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत समेत अन्य नेता शामिल हैं। यह याचिका 12 अक्टूबर को दायर की गई थी। शुरुआती प्रक्रियात्मक कमियों को दूर करने के बाद सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 13 अक्टूबर को इसे पंजीकृत कर लिया।
याचिका में क्या मांग की गई?
याचिका में मांग की गई है कि अदालत इस बात की न्यायिक जांच करे कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, निर्वाचन आयोग को नियंत्रित करने वाले 2023 के कानून और ‘टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप हैं या नहीं। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना नोटिस दिए और सुनवाई का उचित अवसर प्रदान किए बिना मतदाता सूची से न हटाया जाए।
इसके अलावा, याचिका में हटाए गए मतदाताओं की सूची बूथ-वार प्रकाशित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। इस सूची में नाम हटाने के कारणों के साथ संबंधित मतदाताओं का जनसांख्यिकीय विवरण भी शामिल करने का अनुरोध किया गया है।




