रांची : जवाहर विद्या मंदिर (JVM), श्यामली में आज यानी बुधवार को आयोजित ‘अभिज्ञान-2026’ में विद्यार्थियों ने विज्ञान, गणित, कला, तकनीक और सामाजिक विज्ञान से जुड़े मॉडल पेश किए। विद्यालय के दयानंद ऑडिटोरियम में सुबह 8:30 बजे शुरू हुए इस आयोजन में 2000 से अधिक छात्रों ने 800 से ज्यादा मॉडल प्रदर्शित किए। झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के सचिव मनोज कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और कार्यक्रम का आधिकारिक शुभारंभ किया। इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में व्यावहारिक समझ, आलोचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और विश्लेषणात्मक क्षमता विकसित करना था। इसके साथ ही छात्रों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा दिखाने, टीम वर्क सीखने और विषयों को गहराई से समझने का अवसर मिला।
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लोकगीत, कथक और नुक्कड़ नाटक से हुई शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत झारखंड के पारंपरिक लोकगीतों पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य अभय कुमार और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की प्रबंधिका इसलीन कौर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। प्राचार्य बी.एन. झा, छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष एल.एन. पटनायक, कार्यक्रम समन्वयिका सुष्मिता मिश्रा, प्रभाग प्रभारी अमींदर कौर सलूजा, शीलेश्वर झा ‘सुशील’, दीपक सिन्हा और ममता दास सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए निर्णायक मंडल के सदस्य भी मौजूद रहे।
अतिथियों और निर्णायकों का स्वागत अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ और स्मृति चिह्न देकर किया गया। विद्यालय के विद्यार्थियों ने कथक नृत्य, ‘मनसा सततं स्मरणीयम, लोकहितं मम कर्णीयम’ स्वागत गीत और नशा मुक्ति पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया।
नन्हे विद्यार्थियों से लेकर सीनियर छात्रों तक दिखी रचनात्मकता
प्रदर्शनी में अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों ने अपने विषयों के अनुरूप मॉडल तैयार किए। एलकेजी के 180 बच्चों ने ‘ब्यूटी ऑफ सीजन्स’ थीम पर ऋतुओं को दर्शाया, जबकि यूकेजी के 150 विद्यार्थियों ने भारतीय त्योहारों पर आधारित मॉडल प्रस्तुत किए। कक्षा 1 और 2 के 151 बच्चों ने नेबरहुड, फूड, एनिमल किंगडम और पॉल्यूशन जैसे विषयों पर 151 मॉडल प्रदर्शित किए। प्राथमिक वर्ग यानी कक्षा 3 से 5 के विद्यार्थियों ने विज्ञान और गणित के मॉडल के साथ कला और पर्यावरण से जुड़े प्रोजेक्ट भी पेश किए।
विज्ञान में ह्यूमन आई, मिनी वैक्यूम क्लीनर, ‘मिट्टी से रोटी तक’, हरित ऊर्जा और ‘फ्यूचर रांची 2040’ जैसे मॉडल आकर्षण का केंद्र रहे। गणित में ‘मैथ्स इन क्रिकेट’, फ्रैक्शन पिज्जा और जियोमेट्रिकल पार्क प्रस्तुत किए गए। इसके अलावा विद्यार्थियों ने वेस्ट मटेरियल से तैयार 100 क्राफ्ट, पेंटिंग और लाइव लोक कला का प्रदर्शन किया।
विज्ञान और तकनीक के मॉडल बने आकर्षण
कक्षा 6 से 10 के विद्यार्थियों ने भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और कंप्यूटर साइंस से जुड़े मॉडल प्रस्तुत किए। भौतिकी में ग्रेविटी बैटरी, लाई-फाई, टेस्ला कॉइल, मैग्नेटिक लेविटेशन और लैंडस्लाइड अलर्ट सिस्टम शामिल रहे। रसायन विज्ञान में एडिबल वाटर ब्लॉब और फूड फ्रेशनेस इंडिकेटर ने ध्यान खींचा। जीव विज्ञान में डिजिटल पेशेंट और स्मार्ट एग्रीकल्चर के मॉडल प्रदर्शित किए गए। कंप्यूटर साइंस में ‘जार्विस एंड विजन AI’ तथा स्मार्ट पार्किंग सिस्टम के जरिए विद्यार्थियों ने तकनीकी समझ दिखाई।
कक्षा 11 और 12 के विद्यार्थियों ने भी विभिन्न विषयों पर मॉडल पेश किए। भौतिकी में लेजर फोटो फोन और मैग्लेव ट्रेन, जीव विज्ञान में प्लास्टिक ईटिंग माइक्रोब्स और ‘ऑर्गन ऑन अ चिप’ प्रमुख रहे। अर्थशास्त्र में ईरान युद्ध के आर्थिक प्रभाव और ‘एआई वैल्यूएशन बबल’ पर प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए गए। वहीं, राजनीतिक विज्ञान में साउथ चाइना सी और स्पेस कॉलोनाइजेशन जैसे विषयों को प्रदर्शित किया गया।
प्राचार्य और मुख्य अतिथि ने छात्रों का बढ़ाया उत्साह
विद्यालय के प्राचार्य बी.एन. झा ने स्वागत संबोधन में कहा कि ज्ञान का अर्थ केवल किताबें पढ़ना या तथ्यों को याद करना नहीं है। असली ज्ञान सोचने, समझने, विचार करने और कुछ नया करने की क्षमता में है। उन्होंने कहा कि ‘अभिज्ञान-2026’ विद्यार्थियों की प्रतिभा को सामने लाने का मंच है, जहां किताबी ज्ञान को वास्तविक जीवन से जोड़ने का अवसर मिलता है। उनके अनुसार, यह प्रदर्शनी बच्चों की रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देती है।
मुख्य अतिथि मनोज कुमार ने विद्यालय से जुड़ी अपनी पुरानी यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि उन्होंने वर्ष 1995 में इसी परिसर से बारहवीं की परीक्षा पास की थी। उन्होंने कहा कि यह संस्थान उनके लिए सिर्फ स्कूल नहीं, बल्कि उनके जीवन का मंदिर है। मनोज कुमार ने एकीकृत शिक्षा यानी इंटीग्रेटेड लर्निंग की सराहना करते हुए कहा कि आज के जटिल दौर में केवल एक विषय का ज्ञान पर्याप्त नहीं है। ‘अभिज्ञान’ जैसी प्रदर्शनियां विद्यार्थियों में व्यापक समझ और आलोचनात्मक सोच विकसित करती हैं। विज्ञान, कला, भाषा, गणित और सामाजिक विज्ञान का मेल बच्चों को व्यावहारिक और बहुआयामी सोच की ओर ले जाता है।
निर्णायकों ने मॉडल का किया निरीक्षण
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपने मॉडल पूरे आत्मविश्वास के साथ समझाए। नन्हे बच्चों से लेकर कक्षा 12 तक के प्रतिभागियों ने अपने प्रोजेक्ट के पीछे की अवधारणा और उपयोगिता बताई। विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए निर्णायक मंडल के सदस्यों ने एक-एक कक्षा में जाकर मॉडल का निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यार्थियों से सवाल पूछकर उनकी विषय संबंधी समझ और वैचारिक स्पष्टता को परखा। निर्णायकों ने बच्चों के प्रयासों की सराहना की और उन्हें आगे बेहतर काम करने के सुझाव दिए। कार्यक्रम में अभिभावकों, शिक्षकों और शहर के गणमान्य लोगों की भी अच्छी भागीदारी रही। रांची के निर्मला कॉलेज के 50 विद्यार्थियों सहित विभिन्न विद्यालयों से आए छात्रों ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
अभिज्ञान-2026 के साथ रक्तदान शिविर का आयोजन
अकादमिक गतिविधियों के साथ सामाजिक सरोकार को भी महत्व दिया गया। JVM एलुम्नी एसोसिएशन की ओर से विद्यालय के विजिटर्स रूम में रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चले इस शिविर में पूर्व छात्रों, शिक्षकों और आगंतुकों ने हिस्सा लिया। शिविर के जरिए ‘A Small Act Can Make a Big Difference’ और ‘Give Blood, Give Hope, Save Lives’ का संदेश दिया गया।
विद्यालय में आयोजित ‘अभिज्ञान-2026’ में विद्यार्थियों की रचनात्मकता, शिक्षकों के मार्गदर्शन, निर्णायकों के मूल्यांकन और अभिभावकों के उत्साह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रदर्शनी ने छात्रों को अपने ज्ञान को मॉडल और परियोजनाओं के माध्यम से प्रस्तुत करने का अवसर दिया।




