रांची : झारखंड विधानसभा अध्यक्ष के मार्गदर्शन में बाल कल्याण संघ और द एशिया फाउंडेशन, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में झारखंड विधानसभा सभागार में “साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल सुरक्षा और AI : वर्तमान परिदृश्य और चुनौतियां” विषय पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों और नागरिकों को साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव, डिजिटल सुरक्षा के उपायों और साइबर जागरूकता के प्रति संवेदनशील बनाना था।
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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रबिन्द्र नाथ महतो ने कहा कि AI का उपयोग मेडिकल, शिक्षा, प्रशासन और उद्योग समेत लगभग हर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक जहां जीवन को सरल और प्रभावी बना रही है, वहीं इसका दुरुपयोग समाज के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
साइबर ठगी पर सख्त कानून की जरूरत
रबिन्द्र नाथ महतो ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने लोगों को अनेक सुविधाएं दी हैं, लेकिन इसके साथ साइबर अपराध, फर्जीवाड़ा और डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में भी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि साइबर ठगी की एक घटना किसी परिवार की वर्षों की मेहनत की कमाई को पलभर में खत्म कर सकती है। उन्होंने सरकार से साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए और अधिक कठोर कानून एवं मजबूत नीति बनाने की आवश्यकता बताई, ताकि अपराधियों में कानून का भय बना रहे।
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हटिया विधायक नवीन जायसवाल ने कहा कि नई पीढ़ी का जीवन मोबाइल और इंटरनेट से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने स्कूल स्तर से ही साइबर सुरक्षा और AI की शिक्षा शुरू करने की वकालत की। साथ ही विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि सभी विधायकों के लिए भी साइबर एवं डिजिटल सुरक्षा पर नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
लोकतंत्र, डिजिटल सुरक्षा और AI पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने कहा कि AI का दुरुपयोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान फर्जी वीडियो, मॉर्फ्ड तस्वीरों और भ्रामक डिजिटल सामग्री का इस्तेमाल कर जनप्रतिनिधियों की छवि प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने साइबर सुरक्षा के लिए मजबूत कानून और प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई।
रांची विधायक सी.पी. सिंह ने कहा कि तकनीक स्वयं गलत नहीं होती, बल्कि उसका दुरुपयोग करने वाली मानसिकता समस्या पैदा करती है। उन्होंने लोगों से फर्जी ऑफर, संदिग्ध लिंक और ऑनलाइन धोखाधड़ी से सतर्क रहने तथा तकनीक का समझदारी से उपयोग करने की अपील की।
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डिजिटल सुरक्षा को बताया व्यक्तिगत जिम्मेदारी
बाल कल्याण संघ के संस्थापक संजय मिश्रा ने कहा कि कई मोबाइल एप्लिकेशन जरूरत से अधिक जानकारी और अनावश्यक परमिशन मांगते हैं। उन्होंने लोगों को ऐप इंस्टॉल करते समय उसकी अनुमतियों की जांच करने और अनावश्यक ऐप हटाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि डिजिटल सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि हर नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है।
द एशिया फाउंडेशन, नई दिल्ली की नंदिता बरुआ ने कहा कि साइबर सुरक्षा अब जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने बताया कि इस पहल की शुरुआत संसद सदस्यों के साथ की गई थी, जिसके बाद बिहार और अब झारखंड में कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। उन्होंने मजबूत पासवर्ड, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और डिजिटल खातों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया।
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इस अवसर पर साइबर पीस फाउंडेशन के तकनीकी प्रमुख कैप्टन जोशी ने AI आधारित धोखाधड़ी, डीपफेक, फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी वेबसाइट, ओटीपी फ्रॉड और मोबाइल सुरक्षा से जुड़े तकनीकी पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को मजबूत पासवर्ड रखने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करने, ऐप परमिशन की नियमित जांच करने और संदिग्ध लिंक से बचने जैसे व्यावहारिक सुझाव भी दिए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विधायक, जनप्रतिनिधि, विशेषज्ञ, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि और आमंत्रित प्रतिभागी मौजूद रहे।




