रांची : रांची के व्यवहार न्यायालय में मंगलवार को कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एकदिवसीय कार्यशाला-सह-कानूनी जागरूकता कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में महिलाओं को उनके अधिकार, सुरक्षा और शिकायत से जुड़ी जरूरी बातें आसान तरीके से समझाई गईं। आखिर में नुक्कड़ नाटक के जरिए भी लोगों को जागरूक किया गया। यह कार्यक्रम झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति-सह-कार्यपालक अध्यक्ष, झालसा, सुजीत नारायण प्रसाद के दिशा-निर्देश, झालसा की सदस्य सचिव रंजना अस्थाना और रांची के न्यायायुक्त-सह-अध्यक्ष डालसा अनिल कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में हुआ। कार्यक्रम का नेतृत्व डालसा सचिव ने किया।
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कार्यक्रम का आयोजन 6 अक्टूबर 2026 को 40 कोर्ट्स बिल्डिंग, व्यवहार न्यायालय, रांची के कांफ्रेंस हॉल में झारखंड जिला न्यायालय जेंडर सेंसिटाइजेशन और महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) नियम, 2026 के तहत किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप जलाकर हुई। मंच का संचालन न्यायिक दंडाधिकारी एकता सक्सेना ने किया।
न्यायायुक्त बोले- POSH Act महिलाओं के लिए मजबूत कानूनी कवच
न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा ने कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और अच्छा माहौल देने के लिए केंद्र सरकार ने कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 लागू किया है। इसे आम तौर पर POSH Act कहा जाता है। उन्होंने कहा कि यह कानून संगठित और असंगठित क्षेत्र के संस्थानों में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए मजबूत कानूनी कवच है।
पहले सत्र में POSH Act की जानकारी
पहले सत्र में नासरीन जमाल ने POSH Act का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का मकसद कोर्ट परिसर में काम करने वाली या वहां आने वाली महिलाओं को अपने अधिकारों और सुरक्षा के बारे में जागरूक करना है। इस दौरान कार्यस्थल पर सुरक्षा, जेंडर इक्वालिटी यानी स्त्री-पुरुष समानता और शिकायत या मदद के लिए उपलब्ध सपोर्ट सिस्टम के बारे में जानकारी दी गई। ICC और कानूनी सहायता जैसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल करने पर भी चर्चा हुई।
महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों पर हुई चर्चा
दूसरे सत्र में झारखंड हाईकोर्ट की अधिवक्ता आरती ने महिलाओं के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के बारे में बताया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत कानून के सामने समानता, अनुच्छेद 15 के तहत लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं करने और अनुच्छेद 21 के तहत सम्मान के साथ जीने के अधिकार की जानकारी दी। इसके साथ ही अनुच्छेद 39 के तहत गरीब और वंचित लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता से जुड़ी बातों पर भी चर्चा हुई।
यौन उत्पीड़न के मामलों में क्या-क्या शामिल है, समझाया
तीसरे सत्र में एजेसी-7 की वर्धा ने कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से बचाने से जुड़ी जानकारी दी। उन्होंने बिना मर्जी के शारीरिक संपर्क, यौन संबंध बनाने की कोशिश या प्रस्ताव, पोर्नोग्राफी दिखाने और यौन प्रकृति की टिप्पणियों जैसे मामलों के बारे में विस्तार से बताया।
मुफ्त कानूनी मदद और हेल्पलाइन की जानकारी
चौथे सत्र में अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश राजेश कुमार सिंह ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से मिलने वाली मुफ्त कानूनी सेवाओं, काउंसलिंग और कानूनी जागरूकता कैंप के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि महिलाएं, एससी-एसटी वर्ग के लोग, दिव्यांगजन और हिंसा के शिकार लोग मुफ्त कानूनी सहायता पाने के पात्र हैं। उन्होंने महिला हेल्पलाइन नंबर 181 के बारे में भी जानकारी दी। इसके अलावा उन्होंने जांच से लेकर मुकदमे तक अभियोजन की भूमिका, पीड़िता के प्रति संवेदनशील रवैया, पुलिस और कानूनी सहायता वकील के साथ तालमेल, कानूनी अधिकारों की जानकारी, रेफरल व्यवस्था, युवाओं से जुड़े मुद्दे, शुरुआती हस्तक्षेप और न्याय तक पहुंच जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
नुक्कड़ नाटक से भी किया जागरूक
कार्यक्रम के आखिर में रंगमंच नाटक मंडली की टीम ने नुक्कड़ नाटक किया। नाटक के जरिए लोगों को बचाव, सुरक्षा और सम्मान से जुड़ी जरूरी बातें बताई गईं और महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।




