महात्मा गांधी की यादों को संजोकर रखे हैं, आदित्य विक्रम जायसवाल

1928 मॉडल की फोर्ड कार आज भी रांची की सड़कों पर दौड़ती है हमारे पूर्वजों ने राष्ट्रसेवा के लिए त्यागा ‘सर’ और ‘महाराजा’ का सम्मान रांची। स्वतंत्रता आंदोलन और महात्मा गांधी से जुड़ी ऐतिहासिक स्मृतियों को आज भी जायसवाल परिवार ने सहेजकर रखा है। इसी

महात्मा गांधी की यादों

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1928 मॉडल की फोर्ड कार आज भी रांची की सड़कों पर दौड़ती है हमारे पूर्वजों ने राष्ट्रसेवा के लिए त्यागा ‘सर’ और ‘महाराजा’ का सम्मान
रांची। स्वतंत्रता आंदोलन और महात्मा गांधी से जुड़ी ऐतिहासिक स्मृतियों को आज भी जायसवाल परिवार ने सहेजकर रखा है। इसी विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वह विंटेज फोर्ड कार है, जिससे महात्मा गांधी वर्ष 1940 में रांची से रामगढ़ कांग्रेस अधिवेशन के लिए गए थे। परिवार के अनुसार, राय साहब लक्ष्मी नारायण जायसवाल और राम नारायण जायसवाल जी स्वयं इस कार को चलाकर महात्मा गांधी जी को रांची से रामगढ़ लेकर गए थे।
जायसवाल परिवार के राय साहब लक्ष्मी नारायण ने यह फोर्ड कार मंगाई थी। गांधीजी ने रांची स्थित परिवार के आवास, जिसे आज ‘बापू कुटीर’ के नाम से जाना जाता है, से इसी कार में रामगढ़ की यात्रा की थी। परिवार की इस ऐतिहासिक धरोहर को आदित्य विक्रम जायसवाल आज भी पूरी श्रद्धा और जिम्मेदारी के साथ संरक्षित कर रहे हैं।
आदित्य विक्रम जायसवाल बताते हैं कि यह कार उनके लिए सिर्फ एक विंटेज वाहन नहीं, बल्कि महात्मा गांधी और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी जीवंत विरासत है। खास बात यह है कि कार आज भी अच्छी स्थिति में है और रांची की सड़कों पर चलती है। इस ऐतिहासिक कार के संरक्षण का उल्लेख पूर्व में प्रकाशित विभिन्न समाचार रिपोर्टों में भी किया गया है।
जायसवाल परिवार का स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव भी पुराना रहा है। परिवार ने गांधीजी से जुड़ी स्मृतियों के साथ-साथ बापू कुटीर और अन्य ऐतिहासिक धरोहरों को भी संरक्षित रखा है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के आह्वान से प्रेरित होकर हमारे परिवार ने ब्रिटिश शासन द्वारा प्रदान की गई ‘महाराजा’ एवं ‘सर’ जैसी उपाधियों का त्याग किया। हमारे पूर्वज राय बहादुर ठाकुर दास जायसवाल महात्मा गांधी जी के विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने ब्रिटिश सरकार के एडवाइजर के पद से त्यागपत्र दे दिया और राष्ट्रहित एवं स्वतंत्रता संग्राम के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
आदित्य विक्रम जायसवाल ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जोड़ना और ऐसी धरोहरों को सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। गांधीजी की स्मृतियां केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी हमें सेवा, सत्य और समाज के प्रति जिम्मेदारी की प्रेरणा देती हैं।
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