रांची : झारखंड की राजधानी रांची के अशोक नगर रोड नंबर-1 में पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम और उनके परिवार की शिकायत को लेकर भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने CM हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। मरांडी ने DIG आलोक प्रियदर्शी पर लगाए गए रास्ता अवरुद्ध करने, धमकी देने और पद के दुरुपयोग के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि सैयद शरीफ इब्राहिम के परिवार का अशोक नगर में करीब पांच दशकों से निवास है। परिवार का दावा है कि स्वीकृत भवन नक्शे और संबंधित दस्तावेजों में अशोक नगर सोसाइटी की ओर से करीब 40 फीट चौड़ा रास्ता दर्ज है, जिसका इस्तेमाल लंबे समय से आवागमन के लिए किया जाता रहा है। बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में कहा है कि उनके निजी संज्ञान में भी यह रास्ता वर्ष 1964 से खुला और उपयोग में रहा है। शिकायतकर्ता परिवार ने इस संबंध में अरगोड़ा थाना प्रभारी को भी लिखित शिकायत दी है।
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28 सितंबर की शाम रास्ता रोकने का आरोप
शिकायत के हवाले से पत्र में कहा गया है कि 28 सितंबर 2026 की शाम करीब 6 बजे आलोक प्रियदर्शी अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ वहां पहुंचे। आरोप है कि परिवार के मुख्य द्वार के सामने वाहन खड़ा कर रास्ता अवरुद्ध कर दिया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे परिवार के सदस्यों के आवागमन में परेशानी हुई और उन्हें अपने ही घर में बंद रहने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा। शिकायत में परिवार के सदस्यों और बच्चों को कथित तौर पर झूठे मुकदमों में फंसाने, जेल भेजने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं। इसके अलावा हथियार दिखाकर धमकाने और धार्मिक पहचान को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का भी आरोप है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बाबूलाल मरांडी ने छह बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग की
बाबूलाल मरांडी ने CM से पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष वरिष्ठ अधिकारी अथवा उपयुक्त जांच एजेंसी से कराने का आग्रह किया है। उन्होंने शिकायतकर्ता परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है। उन्होंने भूमि के स्वामित्व, स्वीकृत भवन नक्शे, संबंधित अभिलेखों और लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे रास्ते की कानूनी स्थिति की जांच कराने को कहा है। इसके अलावा हथियार दिखाकर धमकाने, रास्ता अवरुद्ध करने, झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी और धार्मिक टिप्पणी के आरोपों की साक्ष्यों के आधार पर जांच कराने की मांग की गई है। मरांडी ने संबंधित पुलिस पदाधिकारी के अंगरक्षकों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उनकी भूमिका केवल सुरक्षा तक सीमित थी या नागरिकों को भयभीत करने के आरोपों से उनका कोई संबंध था।
कानून के शासन और निष्पक्ष जांच पर जोर
CM को लिखे पत्र में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में कानून का राज स्थापित करना और नागरिकों के संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर निर्णय निष्पक्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होना चाहिए। मामले में अब प्रशासन और पुलिस की ओर से होने वाली कार्रवाई पर नजर है।





